मथुरा के हिस्ट्रीशीटर का भौकाल गजब का था। एक दर्जन से अधिक बाउंसर, सभी की एक सी ड्रेस, हाथों में राइफल। यह किसी फिल्म की सीन नहीं है बल्कि लोगों से रंगदारी वसूलने के लिए हिस्ट्रीशीटर महेंद्र सिंह के भौकाल की सच्चाई है। वह क्षेत्र में लगातार रंगदारी वसूलता रहा और पुलिस सोती रही। रंगदारी से तंग आकर एक पीड़ित ने शिकायत की तब जाकर पुलिस की निंद्रा टूटी और मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर, उसके गुर्गे समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया। मुठभेड़ में गोली लगने से हिस्ट्रीशीटर और उसके गुर्गे तो घायल हो गए, लेकिन बाउंसरों को खरोंच तक नहीं आई।
हिस्ट्रीशीटर के साथ पकड़े गए सात साथी निजी सुरक्षा गार्ड प्रतीत हो रहे हैं। पूछताछ में बताया कि कुछ लोग अभी उसके साथ जुड़े हैं, जबकि कुछ पुराने हैं। जिस तरह से एक कंपनी में सुरक्षा कंपनी गार्डों की ड्यूटी बदलती है, उसी तरह हिस्ट्रीशीटर के साथ रहने वाले सुरक्षा गार्डों की भी ड्यूटी बदलती थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पकड़ में आए कुछ बाउंसर तो आर्मी से सेवानिवृत्त बताए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस अभी इस मामले में जांच की बात कहकर चुपी साधे है। सूत्रों का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर किराए पर गार्डों को अपना भौकाल जमाने के लिए दो गाड़ियों में साथ लेकर चलता था।