मैनपुरी। गांव सैदपुर बघौली बौद्ध धर्म की कई दशकों पुरानी स्मृतियों को आज भी समेटे हुए है। करीब 2500 वर्ष पुरानी बताई जाने वाली खंडित मूर्तियां और गुफा प्राचीन काल की धरोहर हैं। समय के साथ ही इस ओर कोई ध्यान न दिए जाने से बौद्धकालीन ये अवशेष भी धीरे-धीरे नष्ट होने के कगार पर हैं।
विकासखंड मैनपुरी के गांव सैदपुर बघौली कभी बौद्ध धर्म के लोगों की ध्यान-स्थली भी रह चुका है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि गांव में अभी भी कई वर्ष पुरानी बौद्धकालीन मूर्तियां मौजूद हैं। हालांकि देखरेख व संरक्षण के अभाव में इनका अस्तित्व खतरे में है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि गांव सैदपुर बघौली 2500 वर्ष पूर्व भी अस्तित्व में रहा है। गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र सिंह के अनुसार गांव में एक टीले पर बबूल का एक घना जंगल था। इस बात की पुष्टि शिक्षक ब्रजेश चतुर्वेदी द्वारा भी की गई।
इन लोगों का कहना है कि आज भी टीले के नीचे एक गुफा के अवशेष हैं। गांव के कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि शायद इस गुफा में बौद्ध भिक्षु ध्यान आदि करते थे। संभवत: उन्हीं लोगों द्वारा गांव में रखीं इन मूर्तियों को गढ़ा गया है। बलुआ पत्थर पर की गई कारीगरी इतनी जीवंत है कि इसे देखकर कोई भी तारीफ किए बिना नहीं रह सकता। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुरातत्व विभाग इस स्थल का संज्ञान ले तो पौराणिक बौद्धकालीन कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हो सकती हैं।
गांव राजपुर और शहर में भी हैं मूर्तियां
गांव सैदपुर बघौली के अलावा बौद्धकालीन ये मूर्तियां पड़ोस के गांव राजपुर में भी हैं। यहां ग्रामीणों ने उक्त मूूर्तियों का संरक्षण करते हुए मंदिर में स्थापित करा दिया है। वहीं शहर में नार्मल स्कूल में भी करीब दो दशक पूर्व कई मूर्तियां थीं। लेकिन देखरेख व संरक्षण के अभाव में वे गायब हो गईं, वहीं कुछ क्षतिग्रस्त होकर नष्ट हो गईं।