ऐतिहासिक फूलों वाले ताजिए की जियारत के लिए रातभर अकीदतमंदों का आना-जाना लगा रहा। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे गुलाब के फूल ताजिए पर चढ़ाए गए। इसके बाद जियारत का सिलसिला और तेज हो गया। मेवा कटरा से निकला अलम का जुलूस फूलों के ताजिए पर हाजिरी देने पहुंचा। जुलूस की अगुवाई खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाजिया, मेवा कटरा के सज्जादानशीन सय्यद मोहम्मद अजमल अली शाह ने की।
रात लगभग एक बजे शिया समुदाय के अजादारों ने मातम किया। चौधरी सरफराज खान ने बताया कि फूलों के ताजिए के उठने के बाद ही शहरभर में रखे गए ताजियों के जुलूस निकाले जाएंगे। फूलों का ताजिया न्यू आगरा कर्बला में दफनाया जाएगा। ताजिए की व्यवस्थाओं में जुएब खान, रोहिल खान, हारिस खान, सोहेल खान, फरहानुद्दीन, मोहम्मद जमींल का सहयोग रहा।
दूसरी ओर, मेवा कटरा से परंपरागत अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। जुलूस मेवा कटरा से फव्वारा चौक, हॉस्पिटल रोड, गुड़ की मंडी, फुलट्टी बाजार और तिलक बाजार होते हुए पाए चौकी स्थित फूलों वाले ताजिए पर पहुंचकर संपन्न हुआ। सदारत मोहम्मद अजमल अली शाह कादरी ने की। जुलूस में शहीदों की याद में नौहे पेश किए गए। जुलूस में सैयद शबर अली शाह, सैयद नकी अली शाह, सलमान अहमद शाह, सैयद इरफान अहमद, सैयद सलीम, समी आगाई, चांद बाबू, अनवर, हाजी इलियास, अख्तर वारसी, जाहिद हुसैन, सनी अख्तर आदि मौजूद रहे।