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#हिंदीहैंहमः हिंदी के प्रचार-प्रसार पर साहित्यकारों की चर्चा, अमर उजाला और कम्युनिटी रेडियो का साझा कार्यक्रम

Thu, 15 Oct 2020 10:50 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

इसका प्रसारण बुधवार दोपहर को तीन से साढ़े तीन बजे और पुन: प्रसारण गुरुवार को सुबह 11 से 11:30 बजे तक किया जाएगा। इसी कड़ी में प्रत्येक रविवार को दोपहर तीन से साढ़े तीन बजे सामाजिक  सरोकार कार्यक्रम का प्रसारण होगा। इसमें शहर, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विषय विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसका पुन: प्रसारण सोमवार को सुबह 11 से 11:30 बजे तक किया जाएगा।
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साहित्य सागर कार्यक्रम में उपस्थिति अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मातृभाषा हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए अमर उजाला और डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 का संयुक्त कार्यक्रम बुधवार से शुरू हो गया। अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम अभियान’ के तहत इस कार्यक्रम में हर बुधवार को साहित्य सागर कार्यक्रम होगा। इसमें लेखन परिचर्चा, प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
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इसका प्रसारण बुधवार दोपहर को तीन से साढ़े तीन बजे और पुन: प्रसारण गुरुवार को सुबह 11 से 11:30 बजे तक किया जाएगा। इसी कड़ी में प्रत्येक रविवार को दोपहर तीन से साढ़े तीन बजे सामाजिक  सरोकार कार्यक्रम का प्रसारण होगा। इसमें शहर, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर विषय विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसका पुन: प्रसारण सोमवार को सुबह 11 से 11:30 बजे तक किया जाएगा।

‘लेके हिंदी की पताका स्वर सहित, डूबिए साहित्य सागर में सदा’
साहित्य सागर की पहली परिचर्चा में साहित्यकार डॉ. सुशील सरित, केंद्रीय हिंदी संस्थान के नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र मिलन ने अपने विचार रखे। डॉ. सुशील सरित ने कहा कि साहित्य सागर कार्यक्रम से और सामाजिक सरोकार कार्यक्रम से समाज में जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने पंक्तियां पढ़ीं, नकारात्मक सोच को करिये विदा। लेके हिंदी की पताका स्वर सहित, डूबिए साहित्य सागर में सदा।
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हिंदी भावनात्मक रूप से जोड़ती है
हिंदी भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करती है। वैश्विक परिदृश्य में भी हिंदी तेजी से बढ़ रही है। अच्छे उद्देश्य के साथ साहित्य सागर की शुरूआत की गई है। -प्रो. उमापति दीक्षित

हिंदी का उपयोग दहाड़ कर करें
मातृभाषा के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं। हिंदी का उपयोग हमें दहाड़ कर करना चाहिए। इसके प्रति हीनभावना लाने की जरूरत नहीं है - डॉ. राजेंद्र मिलन

इस कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाएगा। सामुदायिक रेडियो के श्रोता इनके माध्यम से हिंदी साहित्य की खुशबू को महसूस कर सकेंगे और साहित्य से उनका लगाव बढ़ेगा। - प्रो. लव कुश मिश्रा, निदेशक सामुदायिक रेडियो, विवि.

आज पुन: प्रसारण

सामुदायिक रेडियो की प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव पूजा सक्सेना व इंजीनियरिंग असिस्टेंट तरुण श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम का प्रसारण 15 अक्तूबर को भी सुबह 11:00 से 11:30 बजे तक फ्रिक्वेंसी 90.4 मेगा हर्ट्ज पर किया जाएगा।

 
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