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हिंदी संस्थान में विदेशियों को फर्जी आईडी पर सिमें

Mon, 29 Dec 2014 01:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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केंद्रीय हिंदी संस्थान में विदेशी और गैर स्थानीय छात्राओं के फर्जी आईडी पर मोबाइल सिम लेने का मामला सामने आया है। हाल ही में एक मोबाइल कंपनी ने अपने सत्यापन में 19 छात्राओं की चोरी पकड़ने के बाद सिम को बंद कर दिया है। सवाल है कि संस्थान की छात्राओं को फर्जी आईडी कैसे उपलब्ध हो रही हैं। फर्जी आईडी पर सिम लेना आईटी कानून का उल्लंघन है और इसके तहत पोटा और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
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 संस्थान में अर्मेनिया, अफगानिस्तान, बुल्गारिया, बेलारूस, चेक रिपब्लिक, फिजी, गयाना, जार्जिया, हंगरी, इटली, इंडोनेशिया, जापान, लिथुआनिया, मॉरीशस, मंगोलिया, रूस, श्रीलंका, थाईलैंड, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, आस्ट्रिया, रोमानिया, सूरीनाम, चीन आदि देशों से छात्र, छात्राएं हिंदी सीखने आते हैं। पूर्वोत्तर राज्यों से यहां हिंदी सीखने आने वाली छात्राओं की संख्या भी खासी है। सूत्रों के मुताबिक इन छात्राओं के स्थानीय न होने के कारण सिम उपलब्ध कराने में परेशानी होती है। बताया जाता है फर्जी आईडी के आधार पर एक मोबाइल कंपनी से 150 कनेक्शन लिए गए हैं। इसमें संस्थान की एक महिला कर्मचारी की भी भूमिका है। पहली बार सत्यापन में तो कंपनियों को हिंदी में आईडी के मुताबिक नाम पता बताकर धोखा दे दिया गया। लेकिन 90 दिन बाद दूसरी बार सत्यापन में पोल खुल गई। उनकी सिम बंद कर दी गईं हैं। इस संबंध में अधिकारियों से जब पूछा गया तो उन्होंने इसे छात्राओं का निजी मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया।
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