बहुआयामी रहा लेखन
डॉ. रामविलास शर्मा का लेखन बहुआयामी रहा। साहित्य आलोचना की उनकी तीन पुस्तकें, प्रगति और परंपरा, संस्कृति और साहित्य व साहित्य: स्थायी मूल्य और मूल्यांकन, काफी चर्चा में रहीं। चार दिन, पाप के पुजारी, महाराजा कठपुतली सिंह, मेरे साक्षात्कार, आज के सवाल और मार्क्सवाद, रूपतरंग, मानव सभ्यता का विकास, मार्क्स और पिछड़े हुए समाज, पश्चिमी एशिया और ऋग्वेद, इतिहास दर्शन, भाषा और समाज... सहित उनकी तमाम कृतियां आज भी प्रासंगिक हैं।
निराला पर लिखा शोधपत्र
कवियत्री डॉ. शशि तिवारी कहती हैं कि डॉ. रामविलास शर्मा सबसे अधिक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कृतियों को पसंद करते थे। उन पर शोधपत्र भी लिखा था। निराला, निराला की साहित्य साधना (तीनों खंड), प्रेमचंद, भारतेंदु युग, प्रेमचंद और उनका युग, भारतेंदु हरीशचंद्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण, मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य, भारतीय इतिहास की भूमिका सहित उनकी कई रचनाएं पाठकों के मन में बसती हैं।
ये मिले पुरस्कार
निराला की साहित्य साधना के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, शलाका सम्मान, भारत भारती पुरस्कार, व्यास सम्मान, शताब्दी सम्मान सहित तमाम पुरस्कारों से उन्हें नवाजा गया।
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