आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग में अब नोटिस से लेकर सवाल-जवाब और आदेश तक हिंदी में जारी किए जा रहे हैं। पांच साल पहले यहां अंग्रेजी का बोलबाला होता था, लेकिन अधिकारियों ने धीरे-धीरे राजभाषा हिंदी में कामकाज को बढ़ावा दिया गया। अब 95 फीसदी तक काम हिंदी में हो रहे हैं। लक्ष्य 100 फीसदी का है। हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए कर्मचारियों के बीच प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं।
आगरा की प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम रेनू जौहरी ने बताया कि हिंदी का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। कर्मचारी और अधिकारी आपस में बातचीत हिंदी में ही करते हैं। पहले नोटिस आदि अंग्रेजी में जारी होते थे, लेकिन अब पूरी तरह से हिंदी में हो रहे हैं। एक सितंबर से हिंदी पखवाड़ा शुरू होता है। इसमें निबंध, कविता लेखन जैसी प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं ताकि हिंदी को बढ़ावा मिले।
आगरा कार्यालय में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति का सचिवालय भी है। इसके अंतर्गत 79 सरकारी कार्यालय आते हैं। हिंदी के प्रोत्साहन के लिए इनके बीच हुई प्रतियोगिता में आयकर विभाग कार्यालय को प्रथम स्थान मिला। रेनू जौहरी समिति की अध्यक्ष हैं।
जीएसटी में पत्राचार पूरी तरह से हिंदी में
केंद्रीय जीएसटी के आगरा के आयुक्त ललन कुमार ने बताया कि विभागीय पत्राचार के साथ 95 फीसदी तक काम हिंदी में हो रहा है। हम प्रत्येक वर्ष हिंदी के प्रोत्साहन के लिए पत्रिका भी निकालते हैं। इस वर्ष की पत्रिका जल्द ही आने वाली है। अगर न्यायालय से जुड़े मामलों को छोड़ दिया जाए तो विभाग में बाकी सभी कार्य हिंदी में हो रहे हैं।
हिंदी हमारा गौरव
प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम रेनू जौहरी ने बताया कि मातृभाषा हिंदी हमारा गौरव है, यह समृद्ध और संपन्न भाषा है, आयकर विभाग इसे बढ़ावा दे रहा है, आगरा कार्यालय को इसके लिए पुरस्कार भी मिल चुका है।
लगातार प्रोत्साहन
आगरा के केंद्रीय जीएसटी आयुक्त ललन कुमार ने कहाकि हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए जीएसटी विभाग लगातार काम कर रहा है, हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा कामकाज हिंदी में ही हो।
हर कार्यालय में हो सकता है हिंदी में काम - प्रोफेसर बीना शर्मा
हिंदी हैं हम: प्रोफेसर बीना शर्मा और डॉ. रेखा पतसारिया
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केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रोफेसर बीना शर्मा ने कहा कि किसी भी कार्यालय में हिंदी भाषा में कामकाज में कोई परेशानी नहीं है। बस अधिकारियों और कर्मचारियों के मंशा बनाने और एक निर्देश जारी करने की जरूरत है। हर कोई हिंदी समझता और जानता है। सरकारी कार्यालयों में हिंदी में कामकाज किए जाने से जनता को तमाम योजनाओं का लाभ लेने में और मदद मिलेगी।
कोई परेशानी नहीं आती
आगरा कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रेखा पतसारिया ने कहा कि हिंदी भाषा में कार्य करने में ऐसी कोई परेशानी नहीं आती। वर्तमान में हिंदी जानने वालों की संख्या बढ़ी है। कंप्यूटर की भी तकनीकी दृष्टि से हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ी है। इंटरनेट पर हिंदी में कामकाज बहुत बढ़ गया है, हालांकि सरकारी पत्र लिखने में थोड़ी सी जो क्लिस्ट भाषा होती है उसमें थोड़ी सी समस्या आती है, लेकिन धीरे-धीरे लोग उसके अभ्यस्त हो रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में हिंदी में कामकाज भी किया जाना चाहिए।