फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#हिंदीहैंहम: मातृभाषा के प्रति बढ़ा रुझान, बालिका महाविद्यालय में हिंदी विभाग में सर्वाधिक छात्राएं

Mon, 14 Sep 2020 10:13 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद

सार

हिंदी की तरफ फिर से युवाओं का रुझान बढ़ने लगा है। जो लोग हिंदी को कमजोर मानते हैं, वो मात खा जाते हैं। क्योंकि अन्य विषयों की तैयारियों में जुटे रहते हैं और हिंदी विषय को देखते नहीं थे। इसी भूल से विद्यार्थियों के अंकों का प्रतिशत गिर जाता था।
विज्ञापन
हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार रखने वाले वक्ता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आज हिंदी दिवस है। सुहाग नगरी में तमाम लोग हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहे हैं। हिंदी के प्रति युवाओं का रुझान भी बढ़ रहा है। कई कंपनियों ने मोबाइल एप हिंदी में बनाए हैं या हिंदी का विकल्प दिया है। शहर के प्रमुख बालिका महाविद्यालय में हिंदी विभाग में सर्वाधिक छात्राएं हैं। 
विज्ञापन


हिंदी का प्रचलन पहले से अब बढ़ रहा है। महात्मा गांधी बालिका महाविद्यालय में सर्वाधिक छात्राएं हिंदी विभाग में ही हैं। लोगों को लगने लगा है कि हिंदी से सफलता पाई जा सकती है। कई विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो इंटरमीडिएट पढ़ने के बाद शुद्ध हिंदी नहीं लिख पाते हैं। वह स्नातक से ही हिंदी का महत्व समझते हैं। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हम समय-समय पर वेबिनार कराते हैं। देश की प्रमुख हस्तियों और युवाओं को जोड़ते हैं। डॉ. संध्या द्विवेदी, हिंदी विभागाध्यक्ष, महात्मागांधी बालिका महाविद्यालय।

- हिंदी की तरफ फिर से युवाओं का रुझान बढ़ने लगा है। जो लोग हिंदी को कमजोर मानते हैं, वो मात खा जाते हैं। क्योंकि अन्य विषयों की तैयारियों में जुटे रहते हैं और हिंदी विषय को देखते नहीं थे। इसी भूल से विद्यार्थियों के अंकों का प्रतिशत गिर जाता था। किंतु अब लोगों की समझ में आ गया है। जो लोग अन्य विषयों से पढ़ लेते हैं, वो लोग भी हिंदी विषय से परास्नातक की डिग्री हासिल कर रहे हैं। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं, इससे युवाओं का रुझान हिंदी की ओर बढ़ रहा है। अंजू गोयल,  प्रोफेसर दाऊदयाल महाविद्यालय।
विज्ञापन
विज्ञापन

हिंदी विभाग की छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
हिंदी मातृभाषा तो है ही, इसे नकारा नहीं जा सकते हैं। हमने भी हिंदी विषय को महत्व दिया है। हिंदी से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर रहे हैं। हिंदी भाषा से जुड़े वेबिनार एवं अन्य आयोजन होते हैं। करिश्मा अग्रवाल, बीए द्वितीय वर्ष।

विदेशी लोग स्वीकार करने लगे है कि हिंदी में सफलता पाई जा सकती है। कई विदेशी मोबाइल एप एवं सॉफ्टवेयर ऐसे हैं, जो हिंदी में भी कार्य कर रहे हैं। लोग मोबाइल को हिंदी भाषा में ही प्रयोग करते हैं। ऐश्वर्या गुप्ता, बीए तृतीय वर्ष।

अब हिंदी में आईएएस परीक्षा भी होने लगी है। मैं स्नातक हिंदी से ही कर रही हूं। मैंने हिंदी को इसलिए चुना कि मेरा मानना है कि हिंदी से सफलता और सम्मान भी पाया जा सकता है। जो मातृभाषा हैं, उसमें ज्ञान अर्जित करना आसान है। देश की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। अपूर्वा श्रीवास्तव, बीए तृतीय वर्ष।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें