आगरा की विभव हाईट्स सोसायटी में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सोसायटी के सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्रभाषा हिंदी के गौरव एवं प्रतिष्ठा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे। रिशिता जैन, प्रीति सूरी, रूचि नंदा, पूजा डूमरा, काजल गर्ग, कामना गांधी मौजूद रहीं।
हमराही बोले, हिंदी की प्रतिष्ठा को बढ़ाएंगे
समाचार पत्र वितरकों ने भी संकल्प लिया कि वे हिंदी की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए प्रयास करेंगे। भगवान टॉकीज सेंटर पर अमर उजाला हमराही साथियों ने कहा कि हिंदी हमारा गौरव है, हमारी शान है। अशोक सिंघल, सुमित जाट, संतोष बाटा, ज्ञान चौधरी मुख्य रूप से मौजूद रहे। कारगिल सेंटर पर विनोद जाट, मनीष अग्रवाल, बंटी, बांटी और सौरव मौजूद रहे।
अनंत ज्ञान कराती है हिंदी: सरोज गौरिहार
नागरी प्रचारिणी सभा की सभापति एवं स्वाधीनता सेनानी रानी सरोज गौरिहार ने कहा है कि हिंदी वर्णमाला अ से ज्ञ तक चलती है। अ से अनंत और ज्ञ से ज्ञान यानी हिंदी हमें अनंत ज्ञान कराती है। हिंदी में ऊंचनीच का भाव नहीं होता है, इसीलिए कोई कैपिटल या स्मॉल लेटर भी नहीं होता।
कवयित्री नूतन अग्रवाल के फेसबुक पेज नूतन ज्योति है पर कहीं...पर हिंदी के महत्व के बारे में बात करते हुए उन्होंने ये कहा। उन्होंने हिंदी बोली, ब्रजभाषा, खड़ी बोली में काव्य रचनाएं सुनाईं। हिंदी के दृष्टांत दिए। नूतन अग्रवाल ने हिंदी दिवस पर रानी सरोज गौरिहार का उनके घर पहुंचकर अभिनंदन किया।
नागरी प्रचारणी सभा में सोमवार को हिंदी दिवस समारोह में पूर्व न्यायाधीश सुरेश सिंह यादव को पं. जगन प्रसाद रावत, नागरी प्रचारणी सभा पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। सुरेश सिंह यादव ने इस मौके पर कहा कि भाषा का प्रवाहमयी होना बहुत जरूरी है, प्रवाह उसकी जीवंतता की निशानी है। भाषा उस सरिता के समान है जिसमें नित नया जल आता है और पुराना जल भाषा के साहित्य सागर में समा जाता है।
हिंदी को बनाएं कामकाज और बोलचाल की भाषा: डॉ. आलोक
रोटरी क्लब ने हिंदी दिवस पर वर्चुअल संगोष्ठी करते हुए हिंदी के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। अध्यक्ष डॉ. आलोक मित्तल ने कहा कि हिंदी को कामकाज और बोलचाल की भाषा बनाएं। एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरभि गुप्ता ने कहा कि हिंदी भाषा अपनेपन का अहसास दिलाती है, इस पर हम सभी को गर्व होना चाहिए।
हिंदी और उर्दू दोनों सगी बहनें: डॉ. सिराज
हिंदी दिवस पर हिंदुस्तानी बिरादरी की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ. सिराज कुरैशी ने कहा कि हिंदी और उर्दू दो सगी बहनें हैं। छोटी बहन (उर्दू) बड़ी बहन (हिंदी) को कभी आंखों से ओझल नहीं कर सकती। हमें हर स्तर पर हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में भी हिंदी में भाषण देकर हिंदी भाषा का मान बढ़ाया है। संस्था के विशाल शर्मा ने कहा कि हिंदू देश की बुनियाद है। उर्दू और हिंदी आपस में मिली जुली हुई हैं। हिंदी के माधुर्य को उर्दू के शब्द बढ़ा देते हैं।