मैनपुरी। हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन हम इसे अपने जीवन में धारण नहीं कर पाते हैं। इसी के चलते हिंदी आज भी संघर्ष कर रही है। प्राचीन भाषा होने के बाद भी हिंदी के लिए लोगों को प्रेरित करना पड़ रहा है। इसकी शुरुआत हमें अपने आम दिनों की बोलचाल से ही करनी होगी।
आज भी हम अपनी बोलचाल में हिंदी के अलावा अरबी, उर्दू और फारसी के कई शब्दों का प्रयोग करते हैं। ऐसा नहीं है कि हिंदी में इन शब्दों का कोई विकल्प नहीं है, लेकिन जानकारी के अभाव सैकड़ों सालों से चले आ रही प्रचलन के कारण ये शब्द हमारे दिमाग में घर कर गए हैं। हमें हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बोलचाल में हिंदी के शब्दों को स्थान देते हुए गैर भाषा के शब्दों को बाहर करना होगा। इससे हिंदी के विकास को गति मिलेगी। बृहस्पतिवार को अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में जिले के हिंदी प्रेमियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कभी हमारे देश में शुद्ध हिंदी भाषा बोली जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे हिंदी में कई भाषाओं की घुसपैठ होती रही। हमने भी वही सीखा जो हमने सुना। अब वक्त आ गया है हम हिंदी को सीखें और उसे ही आगे बढ़ाएं।
किरन राठौर।
इतिहास में हम सभी ने पढ़ा है कि हमारे यहां अंग्रेजों से लेकर अरबी और फारसी आक्रांता आते रहे हैं। ऐसे में उनकी भाषा और शब्दावली भी कहीं न कहीं हमारे देश पहुंची। इसके चलते हिंदी को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
मंजू देवी।
आज भी हम बोली जाने वाली हिंदी में कई शब्दों को गलत बोलते हैं तो वहीं कई दूसरी भाषा के शब्द प्रयोग करते हैं। हमें हिंदी के ज्ञान और बढ़ाने के साथ ही बोलचाल में भी इसका शुद्ध प्रयोग करना होगा। तभी बदलाव आएगा।
धर्मेंद्र कुमार।
जब भी हिंदी से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन होता है तो हिंदी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन बाद में सभी ये भूल जाते हैं। हमें हिंदी की दशा सुधारने के लिए सतत प्रयास करना होगा। तभी सफलता हासिल हो सकेगी।
राजेश कुमार।