मैनपुरी। बचपन में दिया गया ज्ञान हृदय की गहराइयों तक स्थान बनाता है। इसलिए बचपन में बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा हमारी मातृ भाषा हिंदी में होनी चाहिए। ऐसा मानना है धर्म विचारकों का।
धर्म गुरु मानते हैं कि धर्म और सत्य का जो ज्ञान हिंदी के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है वह अन्य भाषा के माध्यम से पहुंचाना संभव नहीं है। अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने कहा कि देश की उन्नति के लिए प्राथमिक स्तर से हिंदी को मजबूत किया जाए।
बचपन से ही बच्चों में भरा जाए मातृ भाषा का उत्साह
बच्चों में यदि बचपन से मातृ भाषा का उत्साह भर जाए तो वह जीवन पर्यंत कभी बाहर नहीं निकल सकता है। इसलिए बच्चों को बचपन से ही मातृ भाषा का ज्ञान दिया जाए। जिससे कि बच्चा आगे चलकर हिंदी का विकास कर सके और विश्व में हिंदी की छाप और गहरी बन सके।
अमर साहेब, महंत रज्जो देवी कबीर आश्रम
प्राथमिक के बच्चों को दी जाए हिंदी में शिक्षा
हिंदी हमारी मातृ भाषा है। कक्षा पांच तक के बच्चों को हिंदी में ही शिक्षा दी जाए। जिससे कि बच्चों के हृदय में हिंदी के महत्व को बैठाया जा सके। हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा सकती है।
हरिओम दास, संत
मातृ भाषा हिंदी के बिना उन्नति संभव नहीं
किसी भी देश की उन्नति तभी संभव है जब उस देश के बच्चों को मातृ भाषा में ज्ञान दिया जाए। मातृ भाषा के बिना किसी भी देश की उन्नति संभव नहीं है। यदि हमें अपने देश का विकास करना है तो देश के बच्चों को हिंदी का ज्ञान देना होगा।
आत्माराम दास, धर्म गुरु
हिंदी में ही निहित है देश का सम्मान
देश का हर व्यक्ति चाहता है कि हमारे देश की उन्नति हो और हमारे देश को विश्व पटल पर सम्मान मिले। इसके लिए धर्म पर जोर देना होगा। धर्म और हिंदी के सम्मान के लिए जरूरी है कि हमारे देश के नागरिक हिंदी में शिक्षा लें। हिंदी में ही देश का सम्मान निहित है।
कालीचरन दास, धर्म गुरु