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आत्म विश्वास की भाषा है हिंदी, हर क्षेत्र में मिले सम्मान

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सत्येंद्र पाल सिंह बैस, अधिवक्ता। - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। हिंदी आत्मविश्वास की भाषा है। इसे हर क्षेत्र में सम्मान मिलना चाहिए। वैसे तो विश्व पटल पर छाने के बाद हिंदी मुख्य भाषा के रूप में उभरी है, लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां अभी भी अंग्रेजी भाषा का प्रचलन है। अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमी उच्च और सर्वोच्च न्यायालय में हिंदी भाषा के प्रयोग के पक्षधर दिखाई दिए। उन्होंने हिंदी के उत्थान और विकास पर जोर दिया।
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न्यायालयों में मिलना चाहिए सम्मान
- स्थानीय न्यायालय में तो हिंदी भाषा में आदेश मिलते हैं। उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय के जो आदेश होते हैं वे अभी भी अंग्रेजी भाषा में आते हैं, जिससे वादकारी उलझन में रहते हैं। उच्च और सर्वोच्च न्यायालय में हिंदी भाषा में आदेश मिलने चाहिए। जिससे कि वादकारियों की समस्या का समाधान हो और हिंदी भाषा को और अधिक सम्मान मिल सके।
सत्येंद्र पाल सिंह बैस, अधिवक्ता।
हिंदी हमारे देश की सहज भाषा
- हिंदी भाषा से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। हिंदी हमारे देश की सहज भाषा है। विचारों को सहजता से एक दूसरे तक पहुंचाती है। हिंदी ने विश्व पटल पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। हर क्षेत्र में अब हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए। हिंदी ने रोजगार के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। यह हमारी राष्ट्रीय भाषा है। इसे गैर हिंदीवादी क्षेत्रों में भी बढ़ावा मिलना चाहिए।
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डॉ. जितेंद्र परमार, हिंदी प्रोफेसर।
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