पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर पिनाहट ब्लॉक परिसर में शुक्रवार को आयोजित कृषि मेले में मुख्य अतिथि की कुर्सी को लेकर बाह विधायक पक्षालिका सिंह और पिनाहट ब्लॉक प्रमुख सुग्रीव सिंह चौहान के बीच नोकझोंक हो गई। विधायक इस बात पर नाराज थीं कि मुख्य अतिथि की कुर्सी पर ब्लॉक प्रमुख क्यों बैठे।
सीन-1 : विधायक ने अफसरों से कहा-इन्हें कुर्सी से हटाइए
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे पिनाहट ब्लॉक परिसर में आयोजित कृषि मेले में बाह विधायक पक्षालिका सिंह जब मंच पर पहुंची। मुख्य अतिथि की कुर्सी पर ब्लॉक प्रमुख पिनाहट सुग्रीव सिंह चौहान बैठे हुए थे। यह देख वह भड़क गईं। उन्होंने अधिकारियों से ब्लॉक प्रमुख को कुर्सी से हटाने को कहा।
सीन-2 : कुर्सी की जगह मेज पर बैठ गईं विधायक
अधिकारियों से ब्लॉक प्रमुख को कुर्सी से हटाने की कहने पर विधायक के समर्थक खड़े हो गए। अधिकारी समझ ही नहीं पा रहे थे कि क्या करना है। इस बीच नाराजगी जाहिर करने के लिए विधायक मेज पर बैठ गईं।
सीन-3 : अधिकारी बोले-प्रमुखजी आप दूसरी दूसरी पर बैठ जाइए
हंगामे के बीच अधिकारियों ने ब्लॉक प्रमुख से कहा कि आप दूसरी कुर्सी पर आ जाइए। मुख्य अतिथि की कुर्सी पर विधायकजी को बैठने दीजिए। उधर ब्लॉक प्रमुख जैसे ही उठे, उनके समर्थक कुर्सियों से खड़े हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
क्लाइमेक्स : ब्लॉक प्रमुख उठकर चले गए, हंगामा शांत
एसडीएम अब्दुल बासित ने ब्लॉक प्रमुख और विधायक से बात की। पिनाहट थाना प्रभारी ने ब्लॉक प्रमुख से अकेले में बात की। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख उठकर चले गए। विधायक मुख्य अतिथि की कुर्सी पर बैठ गईं। तब जाकर हंगामा शांत हुआ। थोड़ी देर बाद विधायक भी चली गईं।
अपनी-अपनी बात
मंच पर दो कुर्सियां पड़ी थीं, एक पर मैं बैठ गया
ब्लॉक प्रमुख पिनाहट सुग्रीव सिंह चौहान ने बताया कि मुझे ब्लॉक द्वारा मुख्य अतिथि के रूप आमंत्रित किया गया। मंच पर दो कुर्सियां थीं। एक पर मैं बैठ गया। जो बात विधायक को हजम नहीं हुई। उन्होंने समर्थकों के साथ हंगामा काटा। अधिकारियों के कहने पर मैं मंच हट गया।
ब्लॉक प्रमुख की भाषा शैली सही नहीं थी
बाह विधायक रानी पक्षालिका सिंह ने कहा कि पार्टी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन था जिसमें मैं मुख्य अतिथि थी, वहां ब्लॉक प्रमुख पहले से मुख्य अतिथि की कुर्सी पर बैठे थे। जिसको लेकर मैने बीडीओ से कहा तब उन्होंने और पुलिस-प्रशासन ने उन्हें हटाया। ब्लॉक प्रमुख की भाषा शैली भी सही नहीं थी।