मथुरा। सरकार ने माना है कि मथुरा समेत 256 जिलों में जल प्रबंधन की स्थिति बेहद दयनीय है। इसमें सुधार के लिए 2024 तक काम किया जाएगा। लगातार नीचे खिसक रहे जलस्तर को ऊंचा उठाने के लिए वाटर रिचार्ज कुओं के साथ तालाब बनाए जाएंगे। बरसात के पानी का जमीन में भंडारण करने की प्लानिंग होगी। शुक्रवार को जारी किए गए बजट में इसका प्रावधान किया गया है।
मथुरा में खारा पानी तो सबसे बड़ी समस्या है ही लगातार गिरता भूगर्भ जलस्तर भी लोगों को बेचैन कर रहा है। जिले में 1300 फुट पर पानी मिल रहा है। कुछ इलाकों में इससे भी बुरी स्थिति है। हर साल हजारों नलकूप पानी का साथ छोड़ जाते हैं।
यूं तो मथुरा में पानी का संकट दूर करने को काफी समय से प्रयास हो रहे हैं लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने बजट में भी जल प्रबंधन करने का प्रावधान किया है। मथुरा समेत 256 जिलों की स्थिति बेहद दयनीय मानते हुए बजट तय किया है। सरकार ने जो प्लान तैयार किया है उसके मुताबिक 2024 तक मथुरा में काम किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के आधार पर ही काम किया जाना है।
हजारों तालाबों पर भूमाफिया ने कर लिया कब्जा
कभी हर ग्राम पंचायत में तालाब हुआ करते थे। लेकिन आज तालाब हैं ही नहीं। सब पर भूमाफिया ने कब्जा कर रखा है। लेकिन सब कुछ जानकर भी प्रशासन अनजान बना हुआ है। किसी भी भूमाफिया पर आज तक कार्रवाई नहीं की गई है। अब नए तालाब स्थापित करने की तैयारी होगी। जो बजट जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि जल प्रबंधन के लिए लगातार काम किया जाएगा।
यह होगा काम
- तालाब बनाए जाएंगे, वाटर रिचार्ज कुएं तैयार होंगे, बरसात के पानी के भूमि में स्टोरेज की व्यवस्था होगी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था होगी, लुप्त हो चुकीं नदियों को जीवित किया जाएगा, पानी का दुरुपयोग रोका जाएगा, ग्रीन बेल्ट तैयार की जाएगी व यमुना के किनारे हरित पट्टी विकसित होगी।