उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में यूरोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञ की आपसी तालमेल से अनूठा ऑपरेशन सफल हुआ। किडनी की सर्जरी से पहले मरीज को हृदयाघात पड़ गया था, इतना ही नहीं मरीज लकवा और कैंसर रोग से भी जूझ रही है।
उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में ऐसे मरीज को जीवन मिला, जिसकी किडनी के ऑपरेशन से पहले हृदयाघात हो गया। ये मरीज कैंसर रोगी भी है। दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की आपसी तालमेल से इस मल्टीपल बीमारियों वाली मरीज अब पूरी तरह से ठीक है।
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अस्पताल के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि महिला मरीज को पेशाब में रक्त आने की शिकायत पर भर्ती किया। सोनोग्राफी में किडनी में गांठ मिली। सीटी स्कैन में किडनी के मिड पोल में पांच सेंटीमीटर से अधिक ट्यूमर का पता चला। इसकी रेडिकल नेफेक्ट्रम सर्जरी करने से पहले हृदयाघात हो गया। तत्काल सीपीआर देकर हृदय रोग विभाग में स्थानांतरित किया।
यहां विभागाध्यक्ष डॉ. विनेश जैन की निगरानी में इलाज चला। जांच में हृदय के 30 फीसदी इंजेक्शन फ्रैक्शन हो गया। किडनी ट्यूमर के कारण पेशाब से रक्तश्राव होने लगा। इस पर डॉ. जैन ने जटिल प्रक्रिया टोटल रीनल आर्टरी इंबोलाइजेशन अपनाते हुए किडनी की नस के जरिये कैंसर के ट्यूमर में रक्त की आपूर्ति रोक दी। ये प्रक्रिया आसपास के चुनिंदा अस्पतालों में ही अपनाई जा रही है। हृदय की स्थिति स्थिर होने पर किडनी के विशेषज्ञ डॉ. अग्रवाल ने जटिल सर्जरी कर किडनी को बाहर निकाला। अब मरीज पूरी तरह सुरक्षित है और डिस्चार्ज भी हो गई है।