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बुखार से पीड़ित युवक और महिला ने तोड़ा दम

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मैनपुरी। बुखार से पीड़ित करीमगंज के युवक की मंगलवार रात नोएडा के प्राइवेट अस्पताल में मौत हो गई। परिजन मौत का कारण डेंगू बता रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग जांच की बात कह रहा है। बुखार से पीड़ित महिला ने बुधवार दोपहर गांव में दम तोड़ दिया। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में ही 105 लोगों को उपचार दिया। वहीं बीस मरीजों को परिषदीय विद्यालय में भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
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करीमगंज निवासी राधेश्याम दुबे के पुत्र सौरभ दुबे (38) को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। तीन दिन पहले हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे नोएडा के एक प्राईवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि सौरभ दुबे डेंगू से पीड़ित था। नोएडा में इलाज के दौरान कराई गई जांच के आधार पर डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग युवक की मौत डेंगू से होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। बुधवार की दोपहर गांव निवासी रामनाथ कश्यप की पत्नी प्रेमलता (56) की मौत हो गई। महिला बुखार से पीड़ित थी। मंगलवार को उन्होंने गांव में लगे शिविर में दवा ली थी। बुधवार को भी स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमों ने गांव में कैंप किया। परिषदीय विद्यालय में बुखार से पीड़ित 105 को उपचार दिया गया। वहीं बीस लोगों को भर्ती किया गया।
अब तक छह लोगों की हो चुकी है मौत
करीमगंज में ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। अब तक गांव में पांच सौ ग्रामीण बुखार से पीड़ित पाए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि सौ के करीब लोगों को डेंगू की चपेट में हैं। गांव में मंगलवार रात युवक की और बुधवार दोपहर महिला की मौत के साथ ही मरने वालों की संख्या छह हो गई है। मंगलवार को गांव में बुखार से राशन डीलर विजय चंद्र पांडेय की 52 वर्षीय पत्नी चंद्रकांता पांडेय की मौत हुई थी। इससे पहले 60 वर्षीय राजरानी, 55 वर्षीय करुणा देवी, 74 वर्षीय गंगा देवी की बुखार से मौत हो चुकी है।
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इलाज के लिए घर से लानी पड़ रही चारपाई
मैनपुरी। करीमगंज में मरीजों का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ रहा है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी में भर्ती कराने की जगह स्वास्थ्य विभाग पेड़ों में ड्रिप लटकाकर मरीजों का इलाज करा रहा है। इलाज के लिए मरीजों को चारपाई अपने घर से लेकर आनी पड़ रही है।
करीमगंज की दूरी जिला अस्पताल से मात्र दस किलोमीटर है। कुरावली और सुल्तानगंज की भी दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर के आसपास है। कुरावली और सुल्तानगंज में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास सरकारी एंबुलेंस सेवा है। बावजूद इसके मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की जगह उन्हें गांव में ही उपचार दिया जा रहा है। इससे मरीजों को भी परेशानी हो रही है, साथ ही उनकी उचित देखभाल नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में सिर्फ सुबह दस बजे से दोपहर ढाई बजे तक ही रहती हैं। सीएमओ डॉ. एके पांडेय ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराया जा रहा है। जो मरीज दवा से ठीक हो सकते हैं, उन्हें पर्याप्त दवा गांव में ही दी जा रही है।
चार टीमें कर रहीं उपचार
करीमगंज में बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएमओ के निर्देश पर सीएचसी कुचेला से डॉ.पपेंद्र कुमार, दिनेश चंद्र मिश्रा, मुकेश बाबू और एलटी पूनम को शिविर में भेजा गया है। सीएचसी कुरावली से डॉ. आनंद किशोर और फार्मासिस्ट सर्फराज को करीमगंज भेजा गया है। सीएचसी सुल्तानगंज से संदीप चौहान और अन्य कर्मचारियों को उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त बुधवार को सीएमओ ने जिला मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से डॉ. उमानंद चतुर्वेदी को भी टीम के साथ शिविर में उपचार की व्यवस्था के लिए भेजा है।
पूर्व विधायक ने जाना हाल
करीमगंज में बुखार और डेंगू से मरीजों की मौत की सूचना पर पूर्व विधायक अशोक सिंह चौहान गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से गांव में बुखार से पीड़ितों का हाल जाना। गांव में पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से भी बातचीत की। ग्रामीणों को हर संभव उपचार का भरोसा दिलाया।
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