कासगंज। हेपेटाइटिस पीड़ित के कोरोना की चपेट में आने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसके बाद भी विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना रहा। यहां तक कि इस खतरानक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कोई कार्यक्रम तक आयोजित नहीं किया।
हेपेटाइटिस एक खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी का शिकार होने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। प्रतिवर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस भी मनाया जाता है। जिले में प्रतिवर्ष लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इनमें कई लोगों की तो जान तक चली जाती है।
जनपद में इसका इलाज तो दूर जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं हैं। पीड़ितों को अन्य जनपदों में अपना इलाज कराना होता है। कुछ लोग नीम हकीम के चक्कर में पड़ कर झाड़-फूंक से इलाज कराने लगते हैं। यह लापरवाही भी उनके जीवन को संकट में डाल देती है।
जिले में हेपेटाइटिस से होने वाली मौत
- 11 जून 2018 गंजडुंडवारा में युवक की मौत
- 31 मई 2019 बिलराम में युवक की मौत
- 28 जून 2016 शहर की आवास विकास कॉलोनी में युवक की मौत
बच्चों को नहीं लग पा रहे टीके
विभाग की ओर से बच्चों को हेपेटाइटिस के टीके लगाने की व्यवस्था है, लेकिन इस समय कोरोना के चलते बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित है। जिले में काफी संख्या में इलाके कंटेनमेंट जोन हैं, इससे इन क्षेत्रों में टीकाकरण पर रोक लगी हुई है।
हेपेटाइटिस की पहचान
दस्त, थकान, भूख न लगना, हल्का बुखार, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, मतली, मामूली पेट दर्द, उल्टी, वजन में कमी, डार्क मूत्र, चक्कर आना, सिरदर्द, त्वचा में खुजली, हल्के रंग का मल, त्वचा, आंखों के गोर, जीभ का पीला होना आदि।
इस समय जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है। इस कार्य में लगी आशा कार्यकर्ता को इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश जारी किए गए हैं। - डा. प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ