आगरा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की गई। मेडिकल स्टोर में झोलाछाप शेखर बाला क्लीनिक चला रहा था। उसके साथ दो अप्रशिक्षित नाबालिग किशोर फार्मासिस्ट बनकर मरीज देख रहे थे। बाहर फार्मेसी का बोर्ड लगा था और अंदर मरीजों को ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। इस मामले में चिकित्साधिकारी ने झोलाछाप और दो अज्ञात किशोरों के खिलाफ धोखाधड़ी और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर नोडल अधिकारी अपंजीकृत चिकित्सक डॉ. पीयूष जैन ने बाला फार्मेसी, राहुल नगर, टेढ़ी बगिया का औचक निरीक्षण किया। मौके पर झोलाछाप शेखर बाला 6 से 7 मरीजों का इलाज करता हुआ पाया गया।
भवन पर बाला जी फार्मेसी का बोर्ड लगा था। आगे की तरफ मरीजों को देखा जा रहा था, पीछे कमरे में मरीजों को भर्ती कर बोतलें चढ़ाई जा रही थीं। इलाज करने वाले के पास कोई डिग्री और रजिस्ट्रेशन नहीं था। दो किशोर भी इलाज में मदद कर रहे थे। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर ट्रांसयमुना थाने में संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
मार्च में भी की गई थी कार्रवाई
15 मार्च को ग्वालियर रोड स्थित करीब 12 मेडिकल स्टोर्स और पैथोलॉजी पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने छापा मारा था। अनियमित तरीके से मेडिकल स्टोर्स और पैथोलॉजी में मरीजों का उपचार किया जा रहा था। मरीज भर्ती भी पाए गए थे। सभी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
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कार्रवाई में निरंतरता न होने से हौसले बुलंद
स्वास्थ्य विभाग की ओर से छोलाछापों पर कार्रवाई तो की जा रही है पर इसमें निरंतरता नहीं है। इससे झोलाछापों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। इनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जानकारी मिलने पर झोलाछापों पर कार्रवाई की जाती है। अभियान भी जल्द चलाया जाएगा।