दिवाली है तो पटाखे भी खूब चलेंगे। ऐसे में अगर पटाखों से हाथ-पैर या फिर शरीर का कोई हिस्सा जल जाता हैं, तो उस पर बर्फ न रगड़ें। ठंडे पानी से धोएं, राहत मिलेगी। आंख में बारूद या तिलंगा (जलता हुआ कण) जाए तो रगड़ें नहीं, उसे ठंडे पानी से धोना ही बेहतर है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि अगर जल जाने पर ठंडे पानी से ही आराम मिलता है और घाव भी कम बढ़ता है। फफोले पड़ने पर एंटी बैक्टीरियल क्रीम लगा सकते हैं। जख्म अधिक होने पर चिकित्सक को दिखाएं। नेत्र रोग विशेष डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि आंख में बारूद या फिर तिलंगा जाने पर उसे कतई न रगड़ें। इससे आंख के पर्दे को नुकसान पहुंचता है। ठंडे और साफ पानी से आंखों को धोएं और एंटीबायोटिक ड्रॉप डालें। आराम न मिलने और घाव बनने पर डॉक्टर को दिखा सकते हैं।
ये लोग रहें सावधान
एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि दमा और सांस के रोगी धूल और धुआं से बचें। अगर कोई पटाखा चला रहा है तो मास्क लगा सकते हैं। दवाएं बंद न करें, सांस लेने में परेशानी होने पर इन्हेलर की डोज बढ़वा सकते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल:
- बच्चे जब पटाखे जला रहे हों तो परिजन साथ रहें।
- दमा-सांस रोगी धुएं से बचें, मास्क लगा सकते हैं।
- घर में एंटी बैक्टीरियल क्रीम, एंटीबायोटिक ड्रॉप रखें।
- चश्मा लगाकर पटाखे चलाएं।
- कान की परेशानी वाले तेज आवाज वाले पटाखों से बचें।