भरगैन। पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के दामाद हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश (जयंती) अकीदत के साथ मनाई गई। जयंती के मौके पर हर तरफ खुशी का माहौल छाया रहा। जगह-जगह महफिल मिलाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। अकीदतमंदों ने भरगैन स्थित दरगाह पर चादर चढ़ाकर विश्व शांति के लिए दुआ मांगी।
मुहल्ला भीकन थोक स्थित अवर भरगैन कार्यालय पर हजरत अली के नाम की फातिहा ख्वानी हुई। जिक्र-ए-पाक का आयोजन भी किया गया। समाजसेवी रिहान खान ने इस मौके पर कहा कि हजरत अली इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के दामाद हैं, जिन्होंने मानव सेवा के लिए तमाम सराहनीय कार्य किए। हजरत अली ने इस्लाम को घर-घर तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, योद्धा व प्रशासक सभी गुण उनके अंदर विद्यमान थे। उनके दौर-ए-हुकूमत में कोई भी भूखा नहीं सोता था। हजरत अली की पैदाइश पर जिलेभर में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं भूखों के लिए लंगर का इंतजाम किया गया, तो कहीं सबील लगाकर राहगीरों की प्यास बुझाई गई। घरों में भी हजरत अली के नाम की फातिहा ख़्वानी हुई। मिलाद कार्यक्रम में हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े गए। हजरत अली की जयंती पर प्रशासन ने विशेष सफाई कराई। इस दौरान खालिद, अरबाज, कल्लू, भूरे खान, हुसैन आलम खान, निसा, इंतियाज, इमरान, अमान आदि की मौजूदगी रही।