अगले दिन 15,350 फीट पर चांगवांग घाटी पहुंचे। 14 जून को चांगवांग से सम्मिट कैंप (17,400 फीट ) लोडफेरी के लिए रवाना हुए और वापस चांगवांग घाटी में आ गए। 15 जून को हरेंद्र सम्मिट कैंप से गरुण चोटी के लिए रवाना हुए। 16 जून को सुबह 4 बजे बर्फबारी हो गई। जिससे चोटी के टॉप पर हिमस्खलन हो गया। जिसमें टीम के सभी 6 सदस्य बाल बाल बचे। अगले दिन 17 जून की भोर फिर रवाना हुए और सुबह 10:40 तक ऑपरेशन सिंदूर मिशन की सफलता में भगवा ध्वज फहराया।
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हरेंद्र के साथ रूट मेकर अमित, टीम लीडर ध्रुव, चिकित्सक ईशान और बचाव दल के सदस्य धीरज और जय सिंह रहे। हरेंद्र ने फोन बताया कि वे अगले साल लगभग 25,000 फीट की चोटी पर भगवा ध्वज फहराने की कोशिश करेंगे। उसके बाद अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किली मंजारों पर भगवा ध्वज फहराएंगे। उसके बाद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर जाने का सपना है।