एटा पुलिस को छेड़खानी के एक मामले में आरोपी के खिलाफ रात को रिपोर्ट और सुबह पकड़ कर हथकड़ी लगाना महंगा पड़ गया। पुलिस टीम पर मानवाधिकार आयोग ने दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। दरोगा और पुलिसकर्मियों के वेतन से जुर्माने की रकम की कटौती होगी।
थाना जैथरा में रात को एक युवक के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज की गई। सुबह के समय आरोपी को गिरफ्तार कर हथकड़ी लगा कोर्ट में पेश कर दिया। इस जल्दबाजी और मनमानी में पुलिस फंस गई है। मानवाधिकार आयोग ने दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।
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मामला वर्ष 2016 का है। 22 और 23 जून की रात 12.45 बजे तीन युवकों पर एक युवती ने छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कस्बा के मोहल्ला नेहरू नगर निवासी सुनील को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने गजब की फर्जीपन दिखाते हुए 23 जून की सुबह ही सुनील को गिरफ्तार भी कर लिया। यही नहीं अगले दिन 24 जून को हथकड़ी लगाकर सुनील को पहले जिला अस्पताल और बाद में अदालत ले जाया गया।
इस मामले में बाद में सुनील ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। दोबारा कराई गई विवेचना में सुनील की भूमिका न पाते हुए विवेचना से नाम हटा दिया गया। बिना किसी कसूर के अपने साथ हुई ज्यादती और पुलिस द्वारा उत्पीड़न के विरोध में सुनील ने मानवाधिकार आयोग में अर्जी लगाई। इस पर आयोग ने तल्ख टिप्पणी की है। साफ कहा है कि सात साल से कम सजा के अपराध में पुलिस ने गिरफ्तारी क्यों की? वहीं विवेचना प्रस्तुत करने में जल्दबाजी क्यों की गई? हथकड़ी लगाए जाने पर भी नाराजगी जताई है।
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प्रदेश के मुख्य सचिव को शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। जिसकी वसूली मामले के विवेचक मदन मुरारी और आरक्षी समर सिंह व हरिशंकर से की जाएगी। साथ ही पुलिस महानिदेशक को दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक धनंजय कुशवाह ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों के तहत शिकायतकर्ता के खाते में क्षतिपूर्ति राशि के रूप में दो लाख रुपये भेज दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए प्रक्रिया चल रही है।