जरूरी नहीं कि देश में बदलाव के लिए राजनीतिक नेतृत्व किया जाए। समाज, उद्योग, कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में चुनौतियां स्वीकार कर युवा नेतृत्व के लिए तैयार रहें। इन क्षेत्रों में लीडर बनकर अपना देश संवारें। युवाओं पर ही शांति और समृद्धि लाने की जिम्मेदारी है। अपनी संस्कृति के साथ मानवता के लिए काम करें।
युवाओं में जोश भरकर यह आह्वान किया अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने, जो सेंट पीटर्स कालेज में अमर उजाला और इंस्टीट्यूट आफ पीस एंड कान्फ्लिक्ट स्टडीज (आईपीसीएस) के संयुक्त कार्यक्रम ‘लिविंग हिस्ट्री’ में छात्रों से रूबरू थे।
शिमला में स्कूल और कालेज की पढ़ाई करने वाले हामिद करजई सेंट पीटर्स कालेज पहुंचकर भावुक हो उठे। अपने स्कूली दिनों की याद की, लेकिन उसके बाद अपने जीवन में आए बदलाव का अनुभव साझा करते हुए युवाओं को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया।
करजई ने कहा कि आप हमेशा नेतृत्व करने के लिए तैयार रहें। कड़ी मेहनत सफलता का मूलमंत्र है। समाज में किसी भी क्षेत्र में काम करें तो बदलाव लाने की मंशा से नेतृत्व करें, पहल करें। राजनीति, विज्ञान, तकनीकी, उद्योग, स्वास्थ्य, समाज के क्षेत्र में काम करेंगे तो बदलाव आएगा।
आत्मिक शांति भारत में मिली
हामिद करजई
- फोटो : अमर उजाला
हामिद करजई ने कहा कि भारत के अहिंसा, शांति के संदेश ने प्रेरणा दी। शिमला में पढ़ाई के दौरान आत्मिक शांति का अनुभव हुआ और यहां के विचार, संस्कार, संस्कृति दिल में रच बस गए।
भारत दुनिया का उभरता सितारा है। हजारों साल की सभ्यता, संस्कृति और शिक्षा का खजाना है तो अब दुनिया के ताकतवर देशों में से एक है। अर्थव्यवस्था मजबूत है और दक्षिण एशिया की शक्ति है, लेकिन गांधी के शांति के रास्ते पर चल रहा है। यही इसकी पहचान है।
करजई ने कहा कि अफगानिस्तान और भारत का एक इतिहास है। एक संस्कृति है और एक जैसी चुनौतियां हैं। आतंकवाद और कट्टरवाद से दोनों ही जूझ रहे हैं। दुर्भाग्य से एक ही पड़ोसी से दोनों देश पीड़ित भी हैं, लेकिन तरक्की के मौके दोनों ही देशों के पास हैं। एक दूसरे के आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान से शांति आ सकती है।
1000 अफगानी बच्चों को छात्रवृत्ति देता है भारत
हामिद करजई
- फोटो : अमर उजाला
भारत में अपने पढ़ाई के दिनों की यादों में खोए हामिद करजई ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान को संवारने में काफी मदद की है। एक हजार अफगानी बच्चों को भारत छात्रवृत्ति दे रहा है।
पुनर्निर्माण के लिए भारत पहला देश था, जिसने उनके कार्यकाल में हर क्षेत्र में काम करना शुरू किया। भारतीय मदद ने हमारे घाव पर मरहम लगाया है।
करजई के सेंट पीटर्स कालेज पहुंचने पर बच्चों ने उनके पैर छुए तो वह अभिभूत हो गए। करजई ने कहा कि मेरी इच्छा है कि अपने बच्चे को इस स्कूल में पढ़ाऊं ताकि उनका कल और अच्छा हो सके। बड़ों का आदर करने वाले ऐसे बच्चे देश का भविष्य हैं। मैं दोबारा सेंट पीटर्स आना चाहूंगा।