फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आधा दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां सील

Sat, 25 Jun 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
आधा दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां सील - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं। इन पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कार्रवाई का चाबुक हाथ में ले लिया है। इतना ही नहीं हर स्थिति से निपटने के लिए टीम पुलिस को साथ लेकर चल रही है। इसी का नतीजा है कि यमुनापार क्षेत्र में आधा दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों को सील किया गया। साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण न होने पर चार अस्पतालों को नोटिस दिया। वहीं  मोक्षधाम में दाहसंस्कार के दौरान निकलने वाले धुएं के कार्बन कणों को खत्म करने के लिए एडीए ने हाईटेक यूनिटें लगाने का काम शुरू कर दिया है। 
विज्ञापन


एक्शन-1
आधा दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां सील
पीलाखार में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी कार्रवाई 
पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में काटे बिजली कनेक्शन

यमुनापार क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित आधा दर्जन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने सील कर दिया है। टोरंट ने इन इकाइयों के बिजली कनेक्शन भी काट दिए हैं।
शुक्रवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रामकरन के नेतृत्व में यूपीपीसीबी की टीम ने पीलाखार क्षेत्र में छापेमार कार्रवाई की। इस दौरान एसीएम द्वितीय अरुण कुमार भी मौजूद रहे। वहां अजय गुप्ता, राजा गुप्ता, दिलीप कुमार बंसल, विश्व प्रताप सिंह, गया प्रसाद और रजनी कुमार द्वारा चेतावनी के बावजूद इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां संचालित की जा रही थीं। इन्हें सील कर दिया गया। 
विज्ञापन


दोपहर बाद शुरू हो सकी कार्रवाई
सुबह 11.30 बजे छापेमारी के लिए पहुंची यूपीपीसीबी की टीम को काफी एत्माद्दौला थाना पर फोर्स के मिलने का इंतजार करना पड़ा। दोपहर बाद पुलिस बल मिलने के बाद ही कार्रवाई हो सकी।

यमुना के लिए खतरा बनीं इकाइयां
इलेट्रोप्लेटिंग इकाइयों से सबसे ज्यादा खतरा यमुना को है। दरअसल, इनसे निकलने वाला केमिकल सीधे नदी में मिल रहा है। इससे जलीय जंतुओं का जीवन संकट में है।

डीएम के आदेश पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन्हें पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी।
- रामकरन, आरटीओ, यूपीपीसीबी

कहीं स्टोर रूम तो कहीं खुले में मेडिकल वेस्ट
चार हास्पिटल में कार्रवाई, नोटिस देकर मांगा जवाब
निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण न होने से हर पल संक्रमण का खतरा रहता है। इसके अलावा अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। अंट्रेंड नर्सिंग स्टाफ ही मरीज को देखता है। यह हकीकत प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम की छापेमारी में सामने आई। इस पर हास्पिटल संचालकों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।  
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने भगवान टाकीज स्थित देव स्पाइन आर्थो सेंटर, लंगड़े की चौकी स्थित अनमोल हास्पिटल और सर्वोदय हास्पिटल के अलावा बल्केश्वर के विवेकानंद हास्पिटल में निरीक्षण किया। बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। एसीएमओ डा. अजय कपूर ने बताया कि चारों हास्पिटल में मेडिकल वेस्ट बोरे, स्टोर रूम में भरा हुआ था। अनमोल, सर्वोदय हास्पिटल में डाक्टर ही नहीं मिले। नोटिस देकर जवाब मांगा है। 
अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ कर रहा इलाज
लंगड़े की चौकी स्थित अनमोल हास्पिटल और सर्वोदय हास्पिटल में कोई भी विशेषज्ञ डाक्टर मौके पर नहीं मिला। अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ मरीजोें के इलाज में जुटा था।
मीडियाकर्मियाें से अभद्रता
बल्केश्वर के विवेकानंद हास्पिटल में मीडिया को कवरेज करने से रोका गया। संचालक ने मीडियाकर्मी से अभद्रता भी की।
आंख मूंदकर रजिस्ट्रेशन
हास्पिटल पंजीकरण के वक्त 17 मानकों पर रिपोर्ट लगती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग औपचारिकता निभाता है। मानकों का न सत्यापन होता और न अस्पतालों का निरीक्षण।

मोक्षधाम पर दाहसंस्कार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लगाया जा रहा हाईटेक सिस्टम
फिलहाल चार यूनिट हो रहीं तैयार, 60 लाख का बजट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ताजगंज मोक्षधाम पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए चार हाईटेक यूनिट तैयार की जा रही हैं। इसमें दाहसंस्कार के दौरान निकलने वाले कार्बन के कण शून्य हो जाएंगे। इससे ताजमहल पर प्रदूषण का खतरा नहीं रहेगा।
बता दें कि पिछले साल के आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने मोक्षधाम की वजह से ताजमहल पर पड़ने वाले प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसी दिशा में एडीए ने मथुरा की असर ईको पावर लि. को मोक्षधाम पर हाईटेक सिस्टम लगाने के लिए टेंडर कर दिया था, इस पर काम भी शुरू कर दिया है। यहां वेट स्क्रबर सिस्टम लगाया जा रहा है। चिमनी के माध्यम से धुएं को एक जगह एकत्रित किया जाएगा। फिर केमिकल प्रक्रिया के बाद कार्बन कण शून्य कर दिए जाएंगे। फिलहाल 60 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया गया है। प्रयोग के तौर पर चार यूनिटें तैयार की जा रही हैं। एडीए का दावा है कि इससे संस्कार की प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं आएगा।

विद्युत शवदाह गृह में लगेगी एक और भट्ठी
विद्युत शवदाह गृह को प्रचलन में लाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एक और भट्ठी लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए टेंडर कर दिया गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विद्युत शवदाह गृह में दाहसंस्कार की नि:शुल्क सेवा उपलब्ध है।

मोक्षधाम पर कार्य शुरू करा दिया गया है। उम्मीद है कि एक महीने में यूनिट काम करने लगेंगी। प्रदूषण की रोकथाम हो सकेगी।
- एके सिंह, अधीक्षण अभियंता, एडीए

निगम अफसरों के देखा नाला सफाई का सच 
मानसून से पहले नाला सफाई का सच जानने के लिए नगर निगम के अधिकारी शुक्रवार को शहर में निकले। कई प्रमुख नालों का निरीक्षण किया। कुछ जगहों पर काफी गंदगी मिली। इस पर अधीनस्थ अधिकारियों को इनकी तली झाड़ सफाई कराने के निर्देश दिए।
बता दें कि बुधवार को प्री मानसून की बारिश में नगर निगम की नाला सफाई की पोल खुल गई थी। इसके बाद नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त राम सिंह गौतम और उप नगर आयुक्त अनिल कुमार ने काजीपाड़ा, बिजलीघर, एसएन मेडिकल कॉलेज के पास आदि नालों का निरीक्षण किया। नालों में कई जगह कूड़ा मिला। इस पर अधिकारियों ने सफाई इंस्पेक्टरों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने मानसून से पहले सभी नाले साफ करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें