मैनपुरी। शहर स्थित गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को सिखों के पांचवें गुरु गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु अर्जुन देव ने शहादत दी। वे हंसते-हंसते शहीद हो गए लेकिन उन्होंने मुगलों के धर्म परिवर्तन की बात का स्वीकार नहीं किया।
गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को प्रात: काल पांच वाणिओं का पाठ कर अमृत वेला जत्था ने शबद कीर्तन किया। इसके उपरान्त गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी ने विशेष दीवान सजाकर लोगों को गुरु जी के उपदेश से अवगत कराया। प्रात: 10 बजे तक कीर्तन का आयोजन हुआ सभी धर्मों के लोगो ने गुरु जी की शाहदत को याद किया। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक मधुवन कुमार सिंह ने भी गुरु द्वारा साहिब पहुंचकर गुरु जी का आशीर्वाद लिया।
गुरुद्वारा में मुख्य ग्रंथी ने कहा कि जुल्मी बादशाह जहांीर जिसकी आन दांव पर थी जो पूरे हिंदुस्तान का धर्म परिवर्तन करना चाहता था। दूसरी तरफ गुरु अर्जुन देव जी जिनकी एक हां पर पूरे हिंदुस्तान की कहानी बदल सकती थी। मगर उन्होंने शहादत स्वीकार की लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं। गुरु अर्जुन देव ने अनेक यातनाएं सहीं। गुरु अर्जन देव जी ने मई जून की गर्मी मे गर्म तवे पर बैठकर शहीद होना स्वीकार किया गर्म रेत उनके ऊपर डाली गई पर उन्होंने अपने सिद्धांतो से समझौता नहीं किया। देश धर्म की रक्षा की और शांति पुंज बनकर धैर्य का परिचय दिया।
इस अवसर पर अध्यक्ष राजेश अरोरा, नरेंद्र कालरा, हरदीप सिंह, कुलदीप सिंह, रमेश अरोरा,नाहर सिंह दिलीप सिंह, हरबंस सिंह, केयर सिंह, मुकेश अरोरा, रविंद्र सिंह, जनक सिंह, राजेश छाबड़ा, मान सिंह, गुरदीप सिंह, डॉ एस पी सिंह, भगत सिंह, सनी चांदना, रंजीत सिंह, अंकित छाबड़ा, महक प्रीत, जसलीन, इश्प्रीत, हरगुन, मोहित, मोली, गुरप्रीत, ख़ुशी आदि का सहयोग रहा।