ऐसे बढ़ा कर संग्रहण
| साल |
जीएसटी |
| 2017-18 |
888.78 करोड़ |
| 2018-19 |
1481.50 करोड़ |
| 2019-20 |
1674.88 करोड़ |
| 2020-21 |
1354.37 करोड़ |
| 2021-22 |
1798.12 करोड़ |
सरलीकरण से मिलेगी राहत
कर विशेषज्ञ सीए दीपिका मित्तल ने कहा कि पांच साल में कई बदलाव किए, पर टैक्स का सरलीकरण नहीं हो पाया। जीएसटी संबंधी कानूनी विवाद नए और शुरुआती चरण में हैं जो आगे और बढ़ेंगे, इसलिए इन विवादों को अभी खत्म करने की जरूरत है। व्यापारियों को केवल सरलीकरण से राहत मिलेगी।
जटिलताओं का चक्रव्यूह
आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल ने कहा कि पांच साल से काउंसिल ने जीएसटी की जटिलताओं के चक्रव्यूह में घेर रखा है। ट्रिब्यूनल तक का गठन नहीं किया। हर वस्तु को टैक्स के दायरे में ले आए हैं, जबकि वैट में कई उत्पाद करमुक्त थे। लग्जरी चीजों पर जीएसटी बढ़ाना चाहिए, पर रोजमर्रा की चीजों पर बढ़ाया जा रहा है।
जीएसटी में कमी की जरूरत
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागन दास रामानी ने कहा कि फुटवियर पर जीएसटी की दरें वहीं होनी चाहिए, जो कपड़े पर हैं, पर जीएसटी काउंसिल भेदभाव करके फुटवियर कारोबारियों को मुश्किल में डाल रही है। देश की गरीब आबादी के पैर में चप्पल और जूते होने चाहिए, जिन्हें टैक्स के जरिए महंगा किया जा रहा है। जीएसटी में कमी की जरूरत है।