फर्जी दस्तावेजों से फर्मों का पंजीकरण कराकर करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जालसाजों ने एफआईआर में नामजद फर्मों को फर्जी कारोबार दिखाने के लिए ही बनाया था। इन फर्मों के जरिये सिर्फ कागजों पर आगरा से दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र तक 64 करोड़ रुपये का माल भेज दिया।
इस फर्जी कारोबार को दिखाकर फर्म मालिकों ने करीब 14 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) एडजस्ट कर लिया। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी ने बताया कि ऐसी बोगस फर्मों का मूल रूप से इस्तेमाल कुछ असल फर्मों को कर चोरी में लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है। हालांकि, पूरा सिस्टम ऑनलाइन होने की वजह से कुछ वक्त बाद ही सही पर सभी का खेल पकड़ में आ ही जाता है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल इन फर्मों में से किसी ने भी आईटीसी क्लेम नहीं किया है। ऐसे में विस्तृत जांच होने पर इन फर्मों से जुड़ी कर चोरी करने वाली अन्य फर्मों के भी नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि, अन्य राज्यों से मामला जुड़ा होने की वजह से यह सीजीएसटी विभाग के क्षेत्राधिकार में आता है। अब पुलिस इसकी अपने स्तर से जांच करेगी तो इन फर्मों के असल मालिकों के नाम सामने आएंगे।
बता दें, दिगनेर के दीपक सोनी की फर्म ओम ट्रेडर्स, पुनिया पाड़ा में संदीप की श्री राम ट्रेडर्स, एमजी रोड पर अंकित कुमार के नाम से आरएस ट्रेडर्स, बेलनगंज में शिव प्रताप की बालाजी ट्रेडर्स, आरामबाग, लाइफ लाइन हाॅस्पिटल के पास स्थित आकाश की आकाश ट्रेडर्स, दीपक की सिंह ट्रेडर्स, कछपुरा में लवकुश की पीके ट्रेडर्स के नाम से पंजीकृत फर्मों के खिलाफ राज्य कर विभाग ने लोहामंडी थाने में दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। पुलिस इन दोनों ही मामलों की जांच कर रही है।