आगरा। जीएसटी काउंसिल ने ताजनगरी के पर्यटन और लेदर उद्योग को जोर का झटका दिया है। चंडीगढ़ में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में फिनिश्ड लेदर पर जीएसटी की दरें 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी गई हैं, जबकि जॉब वर्क पर भी 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। इसी तरह अब तक करमुक्त चल रहे होटलों के 1000 रुपये तक के कमरों पर टैक्स 12 फीसदी देना होगा। इससे बजट क्लास और छोटे होटल संचालकों की मुसीबतें बढ़ेंगी। आम लोगों को भी इन चीजों के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा। कोरोना संक्रमण काल के बाद टैक्स में बढ़ोतरी का फुटवियर और पर्यटन उद्योग ने विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है।
ताजनगरी में देश की घरेलू जरूरतों का 65 फीसदी जूता बनता है। निर्यात का 27 फीसदी हिस्सा आगरा के फुटवियर उद्योग का है, लेकिन जीएसटी काउंसिल के फिनिश्ड लेदर पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने से फुटवियर कारोबारियों के सामने बड़ी मुसीबत आ गई है। फुटवियर उद्यमियों के मुताबिक कारोबार के लिए पूंजी फंस जाएगी। इसके रिटर्न के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिसमें सीए और अधिवक्ताओं की जरूरत होगी। समय और श्रम अतिरिक्त खर्च होगा। इसी तरह ताजमहल के शहर के पर्यटन उद्यमियों ने एक हजार रुपये तक के कमरों को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध किया है। शहर में 650 से ज्यादा होटल हैं, जिनमें 95 सितारा होटल हैं और बाकी बजट क्लास।
काउंसिल का फैसला समझ से परे है। फिनिश्ड लेदर के आयात पर 12 फीसदी ड्यूटी पहले से है, अब 12 फीसदी जीएसटी से हमारी पूंजी फंस जाएगी। कारोबार के लिए वर्किंग कैपिटल चाहिए, पर वह टैक्स में फंसी रहेगी। छोटे कारोबारियों की मुसीबतें इससे काफी बढ़ जाएंगी।
ओपिंदर सिंह लवली, अध्यक्ष
आगरा शू मेन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन
फुटवियर के लिए यह फैसला बेहद खराब है। कारोबारियों की सात फीसदी ज्यादा पूंजी सालों के लिए फंसी रहेगी। जो लोग पांच फीसदी टैक्स देकर आसानी से कारोबार कर रहे थे, उनके लिए यह परेशानी भरा कदम है। सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
नजीर अहमद, जूता निर्यातक, एफमेक
कोविड के बाद वैसे ही रॉ मैटेरियल की लागत 30 फीसदी बढ़ चुकी है। इससे लागत और बढ़ेगी, वहीं फुटवियर उद्योग की मुश्किलें भी कई गुना बढ़ जाएंगी। हमारी मांग है कि सरकार इस बढ़ोतरी को वापस ले। इसका कोई औचित्य नहीं है।
राजकुमार जैन, जूता उद्यमी
कोविड के दो साल तक होटल बंद रहे। बजट होटलों ने कैसे बिजली बिल निकाला, ईश्वर ही जानता है। अब टैक्स फ्री कमरे पर 12 फीसदी टैक्स एकदम गलत कदम है। 5000 रुपये से ज्यादा के कमरों पर टैक्स बढ़ा देते, पर यह आम आदमी पर बोझ बढ़ाएगा।
राकेश चौहान, अध्यक्ष
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
खाद्यान्न वस्तुओं पर 5 फीसदी टैक्स और फुटवियर, होटल पर 12 फीसदी टैक्स के कदमों से आम आदमी पर ही बोझ पड़ेगा। परिषद के निर्णय बेहद कठोर हैं। इस समय इनकी जरूरत नहीं थी। इन फैसलों पर पुनर्विचार किया जाए।
सीए सौरभ अग्रवाल, जीएसटी विशेषज्ञ
कारोबार को प्रोत्साहन देने के कदमों की जरूरत थी, पर काउंसिल ने किया एकदम उलट। लेदर और होटलों पर टैक्स बढ़ोतरी के फैसले औचित्यहीन हैं। लग्जरी होटलों में महंगे कमरों पर दरें बढ़ाई जा सकती थी, पर आम आदमी को रियायत की जरूरत थी।
सीए प्रार्थना जालान, जीएसटी विशेषज्ञ