चातुर्मास व्रत के लिए वृंदावन प्रवास को आए द्वारका शारदापीठाधीश्वर एवं ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भक्तों को धर्म और धर्मगुरुओं की उपयोगिता बताई। मंगलवार को रमणरेती स्थित डालमिया हाउस में उन्होंने कहा कि आज देश में ढोंगी साधुओं का चलन बढ़ रहा है। इसका कारण धर्म नहीं बल्कि लोगों में धार्मिक ज्ञान का न होना है। बोले कि सरकार की धर्मनिरपेक्ष नीति ने हिंदू धर्म को हानि पहुंचाई है।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि मुसलमान कुरान की और ईसाई बाइबिल की शिक्षा दे सकता है क्योंकि उन्हें अपनी शिक्षा देने का अधिकार है, लेकिन हिंदू गीता और रामायण की शिक्षा कहां दे। विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा पर रोक है। माता-पिता को समय नहीं है बच्चों को संस्कार देने का। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वे चैनल पर जो धारावाहिक देखते हैं, उसी को सत्य मान लेते हैं। देखा जाय तो सारी धर्म निरपेक्षता केवल हिंदुओं के लिए है।
आज लोग यह भी पूछते हैं कि धर्म की आवश्यकता ही क्या है। आज देश के सामने भ्रष्टाचार की समस्या है, बहुत से लोग दुराचार कर रहे हैं, उनको बचाने का एकमात्र साधन धर्म है। धर्म से न केवल व्यक्ति का आत्म-उन्नयन होता है बल्कि समाज भी आगे बढ़ता है। इस अवसर पर देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का आशीष लिया।