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दूर हो रहा पानी, करीब आ रही परेशानी

Sun, 31 Jan 2016 02:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा।
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बेतहाशा दोहन और मानसून की बेरुखी के चलते भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसकी वजह से शहर में अभी से जल संकट गहराने लगा है। देहात में भी हालात गंभीर हैं। 15 में से 11 ब्लॉक पहले ही डार्क जोन में हैं। इनमें भी आधा दर्जन से अधिक ब्लॉकों में इस साल भूजल का स्तर गिरा है। कुछ इलाकों में जिस तेजी से भूजल में गिरावट आई है, उससे गर्मियों में पेयजल संकट के हालात और बदतर हो सकते हैं। जिले में भूगर्भीय जल का दोहन इतना है कि बरसात का पानी इसकी भरपाई नहीं कर पा रहा है।
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भूगर्भ विज्ञान विभाग के आंकडे़ कड़वी हकीकत बयां कर रहे हैं। वर्ष 2014 की अपेक्षा वर्ष 2015 में आठ ब्लॉकों के जलस्तर में 0.1 से लेकर 0.52 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई। इनमें बाह, बिचपुरी, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, खंदौली, पिनाहट और शमसाबाद ब्लॉक शामिल हैं। बता दें कि बाह, शमसाबाद, सैंया, बिचपुरी में पांच साल में भूजल का स्तर तीन से छह मीटर तक गिरा है। अछनेरा, जगनेर, सैंया, खेरागढ़, जैतपुर, बरौली अहीर में थोड़े बहुत हालात सुधरेे हैं। बताते चलें कि जिले में अकोला, बरौली अहीर, बिचपुरी, फतेहपुर सीकरी, खंदौली, शमसाबाद ब्लाक अतिदोहित श्रेणी में शामिल हैं। हालात चिंताजनक हैं लेकिन इसके बाद भी जल संचय की तरफ न तो लोग जागरूक हो रहे हैं और न ही शासन स्तर पर गंभीरता है।

सबमर्सिबल छोड़ गए साथ
भूजल स्तर में गिरावट की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सबमर्सिबल भी साथ छोड़ते जा रहे हैं। पांच साल पहले जिन क्षेत्रों में दो सौ फुट गहराई पर सबमर्सिबल पंप लगे थे, वर्तमान में तीन सौ फुट से ज्यादा गहराई पर लग रहे हैं। कहीं-कहीं तो इससे भी ज्यादा गहराई पर पंप लगाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि यदि दो पड़ोसियों में से एक ने सबमर्सिबल पंप के लिए रीबोर करा दिया है तो दूसरे की पंप पानी छोड़ गई हैं। ऐसे में लोगों को इन पांच सालों में दो से तीन बार बोरिंग करानी पड़ गई है। इस पर लागत इतनी बढ़ गई कि आम आदमी के लिए इसे कराना संभव नहीं रहा। मारुति एस्टेट, पांडव नगर, आवास विकास, अर्जुन नगर, साकेत कालोनी, जयपुर हाउस, नेहरू नगर, शहीद नगर, विभव नगर, सदर आदि क्षेत्रों में कमोवेश ऐसी ही स्थिति है।
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यमुना बनी नाला
बारिश कम होने की वजह से इस बार सर्दियों में भी यमुना पानी को तरस गई। पिछले कई महीनों से नदी अपने निम्नतम स्तर पर बह रही है। पिछले महीने तो नदी में इतना भी पानी नहीं रहा था कि जल संस्थान को शहर में सप्लाई से पानी उपलब्ध हो सके। इसकी वजह से कई दिनों तक जलापूर्ति बाधित रही थी। इन दिनों भी यमुना 480 फुट के आसपास ही बह रही है। इसमें पानी कम और सिल्ट ज्यादा दिखाई दे रही है। यमुना के पानी पर निर्भर गोकुलपुरा, दरेसी, रकाबगंज, जीवनी मंडी, रावतपाड़ा, बालूगंज आदि क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से जल संकट बना हुआ है। आवास विकास सेक्टर पांच में तो पिछले एक महीने से वाटर वर्क्स के नलों में पानी ही नहीं आया।
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ब्लॉक            2014            2015
अछनेरा            7.89            7.84
अकोला            19.24        19.24
बाह                29.78        30.22
बरौली अहीर        23.89        23.77
बिचपुरी                24.23        24.24
एत्मादपुर            25.28            25.37
फतेहाबाद            36.24            36.64
फतेहपुर सीकरी    13.55            13.64
जगनेर                9.14            7.96
जैतपुर                22.79            22.45
खेरागढ़                18.65            18.23
खंदौली                32.27            32.79
पिनाहट                30.29            30.54
सैंया                    33.74            32.52
शमसाबाद            38.74            38.98

       
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