ताजगंज प्रोजेक्ट में कोवल स्टोन की सड़क बनाने के लिए पर्यटन महानिदेशक अमृत अभिजात ने बखूबी पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में अधिवक्ताओं की बहस के दौरान डीजी टूरिज्म पूरे समय पास खड़े रहे तो कोर्ट की पीठ ने उनसे पूछा कि वह कुछ कहना चाहते हैं। तब उन्होंने ताजगंज प्रोजेक्ट में ग्रेनाइट की सड़क के फायदे गिनाए। मामले में कोर्ट की टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा कि सड़क 50 साल चलेगी और कोलतार की सड़क बनाने से ताज के पास प्रदूषण भी नहीं होगा। अगर प्रोजेक्ट में धांधली हुई तो राज्य सरकार ऐसे अफसरों को कड़ा सबक सिखाएगी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए अनुमति मांगने को सरकार के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने ताजगंज प्रोजेक्ट के लिए अनुमति की याचिका कोर्ट में पेश की। इसमें राज्य सरकार ने कहा कि ग्रेनाइट लाल पत्थर से मजबूत है और आईआईटी ने इसकी सिफारिश की थी। कोलतार की सड़क हर बारिश के बाद रिपेयर करनी होती है। हर दो-तीन साल के बाद सड़क बनाने के लिए कोलतार जलाने से प्रदूषण होगा, इससे बचा जा सकेगा। अधिवक्ताओं के तर्क के बाद डीजी टूरिज्म ने भी अपना पक्ष रखने की गुजारिश की। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट को ईको फ्रेंडली बताने के साथ ही रिवर फ्रंट गार्डन की आगामी योजना से भी जोड़ा।
रेड सैंड स्टोन के पक्ष में एएसआई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद राज्य सरकार के अधिकारी एएसआई के महानिदेशक राकेश तिवारी से मिले और उन्हें ताजगंज प्रोजेक्ट के बारे में बताया। सूत्रों की मानें तो एएसआई ग्रेनाइट की जगह रेड सैंड स्टोन की सड़क के लिए राजी हो सकता है। आगरा शहर में किनारी बाजार, जौहरी बाजार, रावतपाड़ा समेत पुराने शहर की गलियों में यह स्टोन लगा हुआ है। हालांकि, एएसआई अधिकारी ग्रेनाइट को ताजमहल के आर्किटेक्चर में फिट नहीं मानते।
नेशनल मान्यूमेंट अथॉरिटी ने भी एएसआई से मांगे सुझाव
सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगने से पहले ताजगंज प्रोजेक्ट के लिए नोडल विभाग यूपी टूरिज्म ने नेशनल मान्यूमेंट अथॉरिटी को प्रेजेंटेशन देकर अनुमति मांगी थी, लेकिन अथॉरिटी ने भी इस मामले में गेंद एएसआई के पाले में डाल दी है। अथॉरिटी चेयरमैन प्रोजेक्ट से सहमत दिखे, लेकिन उन्होंने एएसआई से सुझाव लेकर काम करने को कहा है।