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भूखल पियासल घटिया आइल बानी हो आदित तोहरी दुआर

Wed, 18 Nov 2015 01:29 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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सांझ की सुंदर बेला में छठ मैया का हेला। व्रती दउरा सजाके कालिंदी किनारे आ गए हैं।
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घाट की शोभा निरखते बनती है। गन्नों के नीचे आस्था के दीप जगमगा रहे हैं। छठ के लोकगीतों की मधुर गुंजार है। भूखल पियासल घटिया आइल बानी हो आदित तोहरी दुआर... जल्दी-जल्दी चली ए बलम जी अरघिया के अबेर हो गईल... कुछ व्रती यमुना जल में कष्ट करने उतरी हैं। हाथ में अगरबत्ती लिए वे आदित्य की आराधना कर रही हैं। कुछ देर बाद आकाश में लालिमा छाने लगती है। सूर्य देव अस्त हो रहे हैं। घाट पर छठ मैया की जय जयकार हो रही है। सभी व्रती यमुना में सूप लेकर खड़ी हो गई हैं। उनके रिश्तेदार सूप से डूबते सूरज को अर्घ्य अर्पित कर रहे हैं। बच्चे आतिशबाजी कर छठ पर्व के उल्लास को व्यक्त कर रहे हैं।
मंगलवार की शाम को बल्केश्वर घाट पर कुछ ऐसा था छठ पूजा का नजारा। खरना के अगले दिन शहर के अलग-अलग कोनों से आए पूर्वांचल के लोगों ने घाट पर सूर्य देव की पूजा की। पूजन के लिए महिलाओं ने घर पर शुद्ध रूप से ठेेकुआ बनाया। दउरा में सभी फल सजाकर वे कालिंदी के किनारे आईं। निर्जल व्रत की साधना करते हुए भी उनके चेहरे पर असीम तेज विद्यमान था।
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घाट पर छठ पूजा की रौनक थी। साफ सफाई व सजावट के साथ छठ के लोक गीत भी गूंज रहे थे। शाम चार बजे से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। आने के बाद गन्ने जमीन में गाढ़े और उन्हें साड़ी ओढ़ाई। उसके नीचे फलों से सजा दउरा और सूप रखा। उसके बाद दीपक जलाकर आदित्य की उपासना की। पांच बजते ही व्रती यमुना जल में खड़ी हो गईं। नदिया के तीरवा पोखरवा ताहि में खिड़की कटाई, ओही खिड़की झाकेली छठीया, भइया हम केकरा घरे जाइ, उन कर भइया सूरज भइया बहिना हमरा घर जाई...। महिलाओं ने लोक गीत गाते हुए सूर्य की पूजा की। घाट पर बच्चों ने आतिशबाजी भी की। पूजा के बाद सबने यमुना मैया की आरती की।
इस अवसर पर भाजपा नेत्री अंजुला सिंह माहौर, एडीएम फाइनेंस राजकुमार, समाजसेवी बबीता चौहान मौजूद थे। पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक चौबे, व्यवस्थापक अखिलेश सिंह, ओमप्रकाश गुप्ता, वाईके शर्मा, अशोक यादव, रवि चौबे, मुन्ना मिश्रा, आरपी राय आदि ने व्यवस्थाएं संभाली।
घर पर बना रहे अस्थाई घाट
पिछले साल की तुलना में बल्केश्वर घाट पर भीड़ कम थी। मैली यमुना और घाटों पर पसरी गंदगी ने लोगों को घरों तक सिमटा दिया है। अशोक चौबे ने बताया कि पूर्वांचल के काफी लोगों ने अपने घरों में ही अस्थाई घाट बना लिए हैं। गंदगी की वजह से वे घर पर ही छठी मैया की पूजा कर रहे हैं। बल्केश्वर को छोड़कर कई स्थान ऐसे हैं जहां यमुना का पानी ही नहीं है। है भी तो मलिन।  
आज उगते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य
बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। प्रात: चार बजे से व्रती घाटों पर पहुंचना शुरू कर देंगे। रीना सिंह ने बताया कि 36 घंटे का निर्जल व्रत सूर्य को अर्घ्य देने के बाद खुलता है। यह बहुत कठिन साधना है। सूर्य सबसे बड़े देव हैं। भोर में घाट पर जाकर दीया बाती जलाएंगे, रंगोली की तरह सजाएंगे। पल्लू में फल लेकर नदी में उतरेंगे। भास्कर के उदित होते ही पांच बार घूमेंगे। उसके बाद हमारे परिवार का कोई व्यक्ति पल्लू में गाय का दूध ढारकर सूर्य को अर्घ्य देगा। इसके बाद पानी पीकर व्रत खोलेंगे। एक दूसरे के घरों में ठेकुआ बांटा जाएगा।
कोसी भरने वाले करेंगे जागरण
मंगलवार की शाम कुछ उपासकों ने कोसी भरी। मनौती पूरी होने के बाद कोसी भरी जाती है। मिट्टी के सकोरे पर सात दीपक जलाते हैं। उस पर पांच पूड़ी, चूना, पूआ सजाकर घाट पर ले जाया जाता है। कोसी भरने वाला व्यक्ति छठ मैया के गीत गाते हुए जागरण करता है।
रामबाग घाट पर पूजन को उमड़े श्रद्धालु
रामबाग घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ पूजन को पहुंचे। व्रती पूजन में तो बहुत सारे लोग उनकी सेवा में तल्लीन नजर आए। घाट पर पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति की ओर से विशेष इंतजाम किया गया था। प्रोजेक्टर के माध्यम से भी छठ पूजन के दृश्य दिखाए जा रहे थे। समिति के महासचिव अभिमन्यु सिंह, फूलचंद गुप्ता, आरके शुक्ला, देवी प्रसाद पांडेय, विनोद तिवारी, अमरीश शर्मा, अर्जुन मंडल, नंदलाल यादव आदि व्यवस्था संभाल रहे थे।  
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101 दीपकों से यमुना मैया की आरती की
श्रद्धालुओं ने 101 दीपकों यमुना मैया की आरती की। यमुना में गंदगी न डालने का भी संकल्प लिया। व्रती महिलाओं के साथ घाट पर पहुंचे बच्चों और परिवार के लोगों ने ढोल-नगाड़ों की धुन पर डांस किया और आतिशबाजी कर अपनी खुशी व्यक्त की।
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