दिल्ली के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी की हाईवे किनारे की करोड़ों की जमीन को हड़पने की साजिश रचने के मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। आरोप है कि कारोबारी का फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी से लेकर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तक तैयार कर लिया गया। कारोबारी की शिकायत पर सिकंदरा थाने की पुलिस ने आरोपी रघुनाथ सिंह पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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नई दिल्ली में मथुरा रोड पर सुखदेव विहार में रहने वाले मनमोहन शास्त्री ने पुलिस से शिकायत की। बताया कि उनका हैंडीक्राफ्ट का व्यापार है। उनकी फर्म महिलाओं को रोजगार देती है। सामान का विदेश तक निर्यात होता है। उनकी एक यूनिट आगरा बाजार ट्रस्ट के नाम पर भी है, जिसमें 100 से अधिक कर्मचारी जुड़े हैं।
उन्होंने बताया कि मौजा लखनपुर में भूखंड गाटा संख्या 5, 6, 8, 9, 27, 28 व 29 कुल 2.99985 हेक्टेयर जमीन वर्ष 1997 में 21 लाख में खरीदी थी। जमीन की रजिस्ट्री वैध रूप से बैनामा विलेख संख्या 3337 के तहत उपनिबंधक कार्यालय आगरा में दर्ज है। इस पर उनका वैध कब्जा है। उनकी संपत्ति में से वर्ष 2015 में कुछ भाग को नेशनल हाईवे विस्तार के लिए अधिग्रहित किया गया था, जिसका मुआवजा 1.59 करोड़ उन्हें प्राप्त हुआ था।
मनमोहन शास्त्री ने बताया कि भूखंड की कीमत में वृद्धि के बाद भूमाफिया सक्रिय हो गए। वर्ष 2014 में उन्हें पहली बार जानकारी मिली कि उनके वोटर कार्ड में उनकी तस्वीर किसी और की लगा दी गई है। शिकायत करने पर दिल्ली के कालकाजी थाने में धोखाधड़ी व जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच में कई फर्जी दस्तावेज मिले। इसमें मुख्य आरोपी रघुनाथ सिंह था।
दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2018 में आगरा में छापा मारकर रघुनाथ सिंह को गिरफ्तार कर लिया, जो खुद को मनमोहन शास्त्री बता रहा था। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और जिलाधिकारी द्वारा जारी फर्जी निवास प्रमाणपत्र तक था। आरोपी रघुनाथ करीब 14 महीने जेल में रहा। बाद में उसे उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी।
उपनिबंधक कार्यालय में दर्ज कराई आपत्ति
कारोबारी ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि अब आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उक्त भूमि को सुशील कुमार जैसवाल सहित तीन अन्य व्यक्तियों को बैनामे के माध्यम से बेचने की कोशिश कर रहा है। इसकी जानकारी उन्हें मिल गई। इस पर उपनिबंधक कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई। एसएसपी को पत्र लिखा था। आरोप लगाया कि उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भी बना लिया गया है। व्यापारी ने सख्त कार्रवाई की मांग की। मामला उच्च न्यायालय इलाहाबाद में विचाराधीन है। एसीपी हरीपर्वत विनायक भोसले ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जब्त जिल्द बही के हस्ताक्षरों का होगा मिलान
एसीपी हरीपर्वत विनायक भोसले ने बताया कि जमीन के मामले में पूर्व में चार केस दर्ज हुए थे। इनमें जांच की गई थी। 12 आरोपी जेल भेजे गए थे। इनमें से एक ही आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिल सकी है। एसआई ने जांच के लिए सदर तहसील के दो जिल्द बही के रजिस्टर जब्त किए हैं, जिसमें कई कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं। जिन कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं, उनके हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। इनका मिलान फोरेंसिक लैब में कराया जाएगा। वहीं फर्जी दस्तावेजों के मामले में जांच के लिए अब नई टीम बनाई जा रही है। दो और मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।