आगरा। दयालबाग में 100 फीट रोड और जयराम बाग से दयालबाग को जोड़ने वाली सड़क का दो किमी. हिस्सा 2 साल में 29 बार धंस चुका है। 15 से 125 फीट तक के गड्ढे हो चुके हैं। व्यवस्था की लापरवाही का आलम यह है कि बारिश होते ही सड़क कागज की नाव की तरह धंस जाती है मगर सीवर लाइन नहीं बदली जा रही है। रविवार को हुए गड्ढे पर वबाग ने फिर मरहम लगा दिया मगर नासूर बन चुके जख्म को भरने की दवा अब भी नहीं की गई।
दयालबाग में अब तक 29 बार सड़क धंसी है। हर बार सीवर मैनहोल से जुड़े पाइप से ही लीकेज मिला है। दो साल पहले एक माह में जब 8-10 बार सड़क धंसी तो तत्कालीन मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर जांच कराई थी। इसके बाद जल निगम, वबाग और नगर निगम के इंजीनियरों ने जांच रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि दयालबाग की पूरी सीवर 12 साल में ही पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। भ्रष्टाचार की नींव से बनाई गई सीवर लाइन में पाइप बेहद खराब गुणवत्ता के लगाए गए। सीवर मैनहोल भी खराब बनाए गए जो बार-बार लीकेज होकर गड्ढों में समा रहे हैं। इस पूरी सीवर लाइन को बदलने की सिफारिश की गई थी। रिपोर्ट के बाद वीए टेक वबाग ने 6.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन नगर निगम से इसके लिए बजट नहीं मिल पाया है।
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हो सकता है बड़ा हादसा
- इन गड्ढों में कई बार कारें फंस चुकी हैं, जबकि दो बार ट्रैक्टर ट्रॉली भी समा चुकी है। यहां लाइन नहीं बदली गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। घटिया निर्माण करने वाले इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की जाए। - सौरभ चौधरी, दयालबाग
सीवर लाइन बदलना जरूरी
जब तक सीवर लाइन नहीं बदली जाती, तब तक ऐसे ही सड़कें खराब होती रहेंगी। शायद नगर निगम हादसे का इंतजार कर रहा है। बिजलीघर की तरह कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। - भरत शर्मा, पार्षद
लाइन बदलवाने का होगा प्रयास
- दयालबाग के जयराम बाग में हुआ गड्ढा भरवा दिया गया है। इस लाइन की जांच के बाद इस प्रस्ताव को भी देखा जाएगा और स्वीकृति कराकर लाइन ही बदलवाने का प्रयास करेंगे। - कुमार गौरव, महाप्रबंधक, जलकल
125 फीट तक के गड्ढे