फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रासायनिक उर्वरक के अत्याधिक प्रयोग से जहरीला हो गया था चारा

विज्ञापन
विज्ञापन
कासगंज। बदायूं जिले की कछला गोशाला में गोवंशों की मौत की वजह बने सोरों से सप्लाई किए गए चारा खेत में रासायनिक उर्वरक के अत्यधिक प्रयोग के चलते जहरीला हो गया था। यह निष्कर्ष मामले की जांच कर रहे अफसरों ने बरेली लैब से उस खेत की मिट्टी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद निकाला जिसमें उपजे चारे को खाने से गोवंशों की मौत हुई। वहीं चारा सप्लाई करने वाले सोरों के ठेकेदार से पूछताछ जारी है।
विज्ञापन

रविवार को कछला की गोशाला में हरा चारा खाने से 22 गोवंशों की मौत हो गई थी। जिस चारे से गोवंशों की मौत हुई थी वह सोरों से गया था। सोरों के ठेकेदार मोनू सक्सेना ने इस चारे की आपूर्ति की थी। बदायूं पुलिस प्रशासन सोरों के इस ठेकेदार से पूछताछ कर रहा है। प्रशासन ने पाया कि चारे में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने से चारा जहरीला हुआ था। लहरा रोड पर जिस खेत से यह चारा भेजा गया था वहां की मिट्टी के नमूने बदायूं कृषि विभाग ने जांच के लिए संकलित किए। बरेली प्रयोगशाला से इसकी जांच कराई गई। जिसमें पाया गया कि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा काफी कम थी, इसलिए पैदावार बढ़ाने के लिए उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग किया गया था। संभवत: इसी कारण चारे में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ गई थी।
आर्गेनिक कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर है नाइट्रोजन
कासगंज। खेतों में नाइट्रोजन ऑर्गेनिक कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर करता है। जिनमें पोटाश, फॉस्फोरस आदि शामिल हैं। यदि खेत में आर्गेनिक कार्बनिक पदार्थ पर्याप्त हैं तो नाइट्रोजन की कमी नहीं होती। कृषि विशेषज्ञ एवं पूर्व डिप्टी डायरेक्टर राजकुमार ने बताया कि कुछ फसलें जैसे चना, अरहर, उड़द, मूंग आदि में वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन को खींचने की क्षमता होती है जबकि मक्का बाजरा की फसल में यह क्षमता नहीं होती। इसलिए किसान उर्वरकों का प्रयोग करतें हैं। नाइट्रोन बढ़ाने के लिए सिर्फ कंपोस्ट खाद की सबसे बेहतर तरीका है। उनका कहना है कि यदि नाइट्रेट से गोवंशों की मौत हुई है तो कीटनाशक से कोई नाइट्रेट पैदा हो गया होगा।
विज्ञापन

एक नजर-
- 0.8 मात्रा में होनी चाहिए खेत में नाइट्रोजन।
- 0.1 से 0.2 तक पाई जा रही जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन।
- 78 फीसद नाइट्रोजन वायुमंडल मे है मौजूद।
- सोरों के समीप खेत से जांच के लिए मिट्टी के जो नमूने मंगाए थे। प्रयोगशाला में उनकी जांच हो गई है। जांच में पाया गया है कि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा काफी कम थी। हो सकता है नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए अत्यधिक उर्वरक डाले गए हों- विनोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बदायूं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें