आगरा पुलिस, पुलिस आयुक्त, agra police, police commissioner
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आगरा में पुलिस ने पर्ची गैंग पकड़कर अंगूठी ठगने की वारदात का खुलासा किया। मगर, पीड़ित की अंगूठी बरामद नहीं कर सकी। इस पर पीड़ित ने पुलिस के गुडवर्क पर सवाल उठाए हैं और अपर पुलिस आयुक्त से शिकायत की है। आरोप लगाया कि चौकी प्रभारी ने आने-जाने का खर्च नहीं देने पर बदमाश पकड़ने में देरी की। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग भी की है।
पुरानी अवधेश पुरी, कमला नगर निवासी चंदन सिंह समाज कल्याण अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2 फरवरी की दोपहर वह बाजार से लौट रहे थे। बदमाश बहाने से उनकी 20 ग्राम सोने की अंगूठी ले गए। सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि केस दर्ज होने के 2-3 दिन बाद चौकी प्रभारी प्रशांत चौहान आए। कहने लगे कि बदमाशों की लोकेशन आगरा से बाहर की है। पुलिस टीम जाएगी और होटल में रुकेगी। इसमें 35 हजार खर्च हो जाएंगे। व्यवस्था कीजिए। रुपये न देने पर पुलिस टीम बदमाशों को पकड़ने नहीं गई।
अधिकारियों से शिकायत करने पर 14 जुलाई को पता चला कि बदमाश पकड़े गए हैं। मगर, अंगूठी बरामद नहीं हुई है। पुलिस ने खुलासे में दावा किया कि बदमाश जग्गू, हाकिम, कुलदीप, महेंद्र और करण ने वारदात की। उन्होंने अंगूठी राह चलते व्यक्ति को 30 हजार रुपये में बेच दी। रुपये बांट लिए। पुलिस की लापरवाही से उनकी अंगूठी बरामद नहीं हो सकी।
ये उठाए सवाल :
- 1.50 लाख रुपये की अंगूठी बदमाशों ने मात्र 30 हजार रुपये में कैसे बेच दी।
- क्या राहगीर जेब में एक साथ 30 हजार रुपये लेकर चल रहा होगा।
- राहगीर ने अंगूठी सोने की है या किसी धातु की पॉलिश की, जांचे बिना खरीद लिया।
- पुलिस ने 30 हजार में से 25270 रुपये बरामद किए। क्या बदमाश 5 महीने में सिर्फ 5000 रुपये ही खर्च कर पाए।
- समय पर केस दर्ज कर लोकेशन मिलने के बाद पुलिस टीम पकड़ने रवाना क्यों नहीं हुई।