ताजनगरी के लोगों के लिए अच्छी खबर है, शहर अभी कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण की चपेट में नहीं है। इसका पता करने के लिए 12 से 18 जून के बीच विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 210 नमूनों में से महज दो ही संक्रमित मिले हैं। ये दोनों भी अस्पताल स्टाफ हैं।
विज्ञापन
लॉकडाउन खुलने के बाद कोरोना के मरीजों में डेढ़ गुना तक वृद्धि हुई। कहीं सामुदायिक संक्रमण का खतरा तो नहीं, इसका पता करने के लिए पहले चरण में घनी आबादी, अस्पताल स्टाफ, वृद्धाश्रम से नमूने लिए गए। इसमें ताजगंज, मंटोला, जगदीशपुरा समेत पांच घनी आबादी वाले क्षेत्रों से 60 लोगों के नमूने लिए।
इनमें ऑटो चालक, सब्जी विक्रेता, कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी समेत अन्य रोजगार करने वाले लोग भी शामिल रहे। वृद्धों में संक्रमण का ज्यादा खतरा है, इसके लिए रामलाल वृद्धाश्रम, रुनकता स्थित समेत तीन वृद्धाश्रमों से 40 वृद्धों के नमूने लिए।
अस्पतालों में क्या हाल है, इसके लिए 45 से अधिक प्राइवेट अस्पतालों के स्टाफ से 110 नमूने लेकर लैब में जांच कराई। इनमें अस्पताल के दो स्टाफ में संक्रमण मिला, जिनको एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर इलाज शुरू करा दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि सामुदायिक संक्रमण नहीं है। इसके खतरे को पता करने के लिए जगह-जगह से लिए गए 210 नमूनों में से दो ही संक्रमित मिले हैं।
अब ढाबा संचालक, हॉकर-वेंडर के नमूने लिए जा रहे
दूसरे चरण में ढाबा संचालक, होटल-रेस्टोरेंट में कार्य करने वाले कर्मचारी, हॉकर, डिलीवरी ब्वॉय, वेंडर, चालकों के नमूने लिए जा रहे हैं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने वाले इन कर्मचारियों के नमूने लेकर जांच कराए जाएंगे।
मास्क और सामाजिक दूरी जरूरी
लॉकडाउन के बाद संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका पता करने के लिए नमूने लेकर जांच भी करा रहे हैं। कोरोना वायरस की चेन तोड़ने में कामयाबी मिली है। लोगों से अपील है कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर जाएं, मास्क का अनिवार्यता से उपयोग करें और एक से डेढ़ मीटर की दूरी बरतें तो निश्चित ही शहर कोरोना मुक्त हो जाएगा। - प्रभुनारायण सिंह, डीएम
ये बरतें सावधानी
- भीड़भाड़ वाले बाजारों में जाने से बचें।
- मास्क या फिर थ्री लेयर कपड़े से मुंह ढकें।
- हाथों को सैनिटाइज करें, साबुन से हाथ धोएं।
- एक से डेढ़ मीटर की दूरी से लोगों से बात करें।
- मास्क-ग्लव्स लगाए विक्रेताओं से ही फल-सब्जी खरीदें।
ये होता है सामुदायिक संक्रमण
आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि जब कोरोना वायरस मोहल्ला, कॉलोनी में व्यापक रूप से फैल जाए और काफी संख्या में मरीज सामने आने लगें तो यह सामुदायिक संक्रमण बोला जाता है। अभी ऐसे हालात नहीं हैं, लोगों से अपील है कि मास्क लगाएं, हाथों को थोड़ी-थोड़ी देर में धोते रहें और एक से डेढ़ मीटर की दsूरी सबसे बढ़िया दवा और बचाव के संसाधन हैं।