मैनपुरी। दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को राहत देने के लिए शासन ने गोकुल मिशन की शुरुआत की है। इसके तहत जिले के 300 गांवों में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान को निशुल्क कर दिया है। इससे जहां पशुओं में नस्ल सुधार होगा तो वहीं पशुपालकों पर भी बोझ कम पड़ेगा।
गाय और भैंस में नस्ल सुधार और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। इसके लिए शासन से तीस रुपये का शुल्क निर्धारित है। लेकिन शासन ने अब गोकुल मिशन योजना शुरू की है। इसके तहत जिले के 300 गांवों का चयन किया है। इनमें कृत्रिम गर्भाधान के लिए किसानों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे पशुपालक जहां कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रेरित होंगे तो वहीं नस्ल सुधार होने से दूध का उत्पादन भी बढ़ेगा। इसके लिए पशु चिकित्सालयों पर सूची भी चस्पा कराई गई है।
कृत्रिम गर्भाधान से आवारा आतंक रोकने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए दो साल पहले सेक्स शॉर्टेड सीमेन की शुरुआत की गई थी। इसकी मूल कीमत तो एक हजार से भी अधिक है, लेकिन शासन की ओर से पशुपालक से केवल 300 रुपये ही लिए जाते हैं। इस सीमेन से केवल मादा बछड़ा और पड़िया ही जन्म लेते हैं।
गोकुल मिशन के तहत जिले के 300 गांवों में निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है। सभी पशु चिकित्सालयों पर इसकी सूची भी चस्पा करा दी गई है। पशुपालकों को इससे लाभ हो रहा है।
डॉ. विपिन कुमार गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।