आगरा में गोवा के पर्यटक ने लूट की सूचना पुलिस से खातिरदारी कराने के लिए दी थी। पांच महीने पहले वो अपने मकसद में कामयाब हो गया था। पुलिस को बैग चोरी की सूचना देकर होटल में मुफ्त में तीन रात गुजारी थीं। गोवा की टिकट से लेकर रास्ते में खाने-पीने का पैसा तक मिला था। मगर, दूसरी बार पुलिस ने उससे सच उगलवाने के लिए देसी तरीका अपनाया। वह हिंदी बोलने लगा, झूठी कहानी का सच भी उगल दिया। माफी मांगने पर उसे जाने दिया गया।
पुलिस सेवी डिसिल्वा को साथ लेकर घटनास्थल की जांच कर रही थी। उसने पहले बताया कि मथुरा से बस से आया। इसके बाद ऑटो किया था, लेकिन वह ऑटो करने वाले स्थान की जानकारी नहीं दे सका। उसने कैब से आने की बात कही। इस पर मथुरा टोल के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए गए। उसने एक ऑटो का नंबर बताया। वह भी गलत निकला। इस पर पुलिसकर्मी उसके सामने हिंदी में बात करने लगे। कहा कि पर्यटक की बातों में झोल है, उसे सुनसान जगह पर ले जाकर पूछताछ करेंगे। सख्ती से पूछने पर ही सच उगलेगा। यह सुनकर सेवी घबराने लगा, यह पुलिस ने देख लिया। बाद में पुलिसकर्मी उससे हिंदी में बात करने लगे। यह सुनकर पर्यटक नो-नो करने लगा। पुलिस को उसके हिंदी की जानकारी होने का पता चला। बाद में पूछने पर सच बता दिया।
उसने बताया कि वह बेल्जियम नहीं, बल्कि गोवा का रहने वाला है। दिल्ली में रह रहा था। उसके पास रुपये खत्म हो गए थे। वह गोवा जाना चाहता था। पहले 25 अप्रैल को आगरा आया था। तब थाना कमला नगर में बैग चोरी की सूचना दी थी। पुलिस ने उसे होटल में रुकवाया था। उसे जाने की टिकट के साथ रास्ते में खर्च के लिए रुपये दिए थे। अब भी उसे लग रहा था कि वापस पुलिस की मदद से चला जाएगा, लेकिन इस बार भेद खुल गया।
पर्यटन थाने का सिपाही दीपक पहले कमला नगर में तैनात था। 25 अप्रैल को सेवी आगरा आया था और कमला नगर थाने में चोरी की सूचना दी थी। अब पर्यटन थाना आने पर दीपक ने उसे पहचान लिया।
पर्यटक ने अपनी गलती मानी है। वह माफी मांग रहा था। उसके साथ लूट नहीं हुई थी। पुलिस से मदद के लिए लूट की फर्जी सूचना दी थी। अब उसने कहा कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगा। उसके खिलाफ कोर्ट में धारा 182 की रिपोर्ट भेजी जाएगी। फिलहाल उसे जाने दिया गया है। - जय सिंह परिहार, निरीक्षक, पर्यटन थाना