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मैनपुरी में हुआ था गीतांजलि श्री का जन्म

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मैनपुरी। बुकर पुरस्कार के लिए इस बार लेखिका और साहित्यकार गीतांजलि श्री की पुस्तक रेत समाधि का अंग्रेजी रूपांतरण टॉम्ब ऑफ सेंड का चयन किया गया है। अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के लिए उनकी पुस्तक के चयन से हर्ष का माहौल है।
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लेखिका गीतांजलिश्री का मैनपुरी से पुराना नाता रहा है। उनका जन्म 12 जून 1957 को मैनपुरी में हुआ था। लेखिका गीतांजलि श्री के पिता अनिरुद्घ पांडेय सिविल सेवा में थे। उनके जन्म के दौरान उनकी तैनाती मैनपुरी में बतौर कलेक्टर के पद पर थी। बचपन के दो साल का समय उन्होंने मैनपुुरी में गुजारा। इसके बाद उनके पिता का स्थानांतरण हो गया और वे फिर कभी लौटकर मैनपुरी नहीं आईं। गीतांजलि श्री बताती हैं कि उन्हें तो मैनपुरी के संबंध में कुछ याद नहीं हैं, लेकिन उनकी मां श्री पांडेय ने उन्हें जो बताया वह आज भी याद है। वे कहती हैं कि मेरा सौभाग्य है कि मैनपुरी से मेरा जुड़ाव रहा है।
क्या है बुकर पुरस्कार
बुकर पुरस्कार इंगलैंड द्वारा लेखन के क्षेत्र में दिया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है। इसकी स्थापना सन 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी। इसमें 50 हजार पाउंड की राशि लेखक को दी जाती है। पुरस्कार के लिए पहले उपन्यासों की सूची तैयार की जाती है और फिर पुरस्कार वाले दिन की शाम के भोज में पुरस्कार विजेता की घोषणा की जाती है। पहला बुकर पुरस्कार अलबानिया के उपन्यासकार इस्माइल कादरे को मिला था। विजेता की घोषणा इस बार 26 मई को लंदन में होने वाले समारोह में की जाएगी।
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