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जिले में गन्ना किसान तो बढ़़े लेकिन रकवा घट गया

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कासगंज। जिले में ई गन्ना प्रणाली लागू होते ही गन्ने के रकवे और किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। सैकड़ों किसानों ने ऑनलाइन भू दस्तावेज दाखिल करते हुए पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया। विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया। अब सत्यापन का काम शुरू कर दिया गया है।
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गन्ना आयुक्त ने गन्ने की खरीद और बिचौलियों का हस्तक्षेप रोकने के लिए ई गन्ना प्रणाली लागू की है। इस प्रणाली के तहत किसान ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और पंजीकरण के साथ ही सट्टा प्रदर्शन भी कर सकते हैं। जिले में पिछले 15 दिनों में सैकड़ों नए किसानों ने ऑनलाइन प्रणाली के तहत अपने पंजीकरण कराए हैं। गन्ना विभाग ने इन किसानों के आवेदन स्वीकारते हुए इन्हें पंजीकृत कर लिया है। विभाग तहसील से इनके भू अभिलेख प्रमाणित करा रहा है। जबकि उन्हीं अभिलेखों के आधार पर गन्ना खरीद के लिए भूखंड का सत्यापन कर रहा है। नई प्रणाली लागू होने के बाद पिछले साल की अपेक्षा इस साल गन्ने का रकवा तो घट गया है, लेकिन किसानों की संख्या बढ़ गई है। इस प्रणाली ने प्राथमिक स्तर पर ही पारदर्शिता का प्रमाण दे दिया है।
शपथ पत्र भी लिए गए
कासगंज। नया पंजीकरण कराने वाले किसानों से गन्ना विभाग ने शपथ पत्र ले लिए हैं। शपथ पत्र में सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से मांगी गईं। गन्ना विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई जानकारी झूठी पाई गई तो संबंधित किसान का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
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आंकड़े की नजर से-
- 7725 किसान पहले से हैं पंजीकृत।
- 514 नए किसानों के हुए पंजीकरण।
- 8239 किसान अब तक गन्ना विभाग में हो चुके पंजीकृत।
- 11552 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पिछले साल हुआ था गन्ना।
- 7925 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस बार तय है गन्ने का लक्ष्य।
- नए किसानों के पंजीकरण कर लिए गए हैं। इन किसानों से शपथ पत्र भी ले लिए गए हैं। ई गन्ना प्रणाली व्यवस्था से बिचौलिये सक्रिय नहीं हो पाएंगे। ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।
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