आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि विदेश में बैठे साइबर ठग अपने एजेंटों पर भरोसा नहीं करते थे। उन्हें आशंका रहती कि करोड़ों रुपये की रकम खातों में आने पर एजेंट की नीयत बिगड़ सकती है। इसलिए वह एजेंट के मोबाइल की आईडी पर खाता खुलवाने के बाद उसकी डिटेल टेलीग्राम से अपने पास मंगा लेते थे। एपीके फाइल में मोबाइल एक्सेस करने के लिए लिंक भेजते थे। जितनी भी रकम आती थी, उसे अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।
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