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Agra News: गांधी स्मारक को किया संरक्षित, पार्षद पर कब्जे का आरोप

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गांधी स्मारक, जिसे अब राज्य सरकार ने संर​क्षित स्मारक घो​षित किया है।
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आगरा। एत्माद्दौला स्थित गांधी स्मारक को राज्य सरकार के पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित किया है। इस पर अपना कब्जा लेने के लिए पुरातत्व विभाग के निदेशक ने डीएम को पत्र भेजा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि क्षेत्रीय पार्षद प्रियंका अग्रवाल ने इस पर अनाधिकृत कब्जा कर रखा है, वहीं पार्षद ने उन पर लगाए गए आरोपों को नकार दिया है और कहा कि नगर निगम के पास गांधी स्मारक की चाबी है, पुरातत्व विभाग वहीं से कब्जा ले सकता है।
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राज्य सरकार के पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी के मुताबिक, तहसील सदर के एत्माद्दौला क्षेत्र में मौजूद गांधी स्मारक को संरक्षित श्रेणी में शामिल किया गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी का आरोप है कि गांधी स्मारक पर नवलगंज की स्थानीय पार्षद प्रियंका अग्रवाल ने कब्जा कर लिया है। स्टेट एएसआई की टीम जब परिसर में प्रवेश करने के लिए पहुंची तो ताला लगा हुआ था। पार्षद इस स्मारक को अपने निजी कार्यों के लिए उपयोग कर रही हैं, जिस वजह से पुरातत्व विभाग की टीम को प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने डीएम से गांधी स्मारक को कब्जामुक्त कर विभाग को कब्जा दिलाने की मांग की है।

- गांधी स्मारक नगर निगम के पास है और उसी के पास इसकी चाबियां हैं। हमारा इस पर कोई कब्जा नहीं है। न ही कभी इसका व्यक्तिगत उपयोग किया गया है। पुरातत्व विभाग नगर निगम जाकर इस संबंध में वार्ता कर सकता है।
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प्रियंका अग्रवाल, पार्षद, नवलगंज

97 साल पहले बापू ने किया था प्रवास
महात्मा गांधी यमुना किनारे एत्माद्दौला स्मारक से सटी इस बगीची में स्वास्थ्य लाभ के लिए 11 से 21 सितंबर 1929 तक रहे थे। 1948 में बापू की हत्या के बाद इसे स्मारक बना दिया गया। गांधी स्मारक में लगी पट्टिका के अनुसार महात्मा गांधी ने बृजमोहन दास मेहरा की बगीची में कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और प्रभावती के साथ प्रवास किया था। वर्ष 1948 में बृजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता रामकृष्ण दास मेहरा की स्मृति में बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया। यहां वर्ष 1955 में महात्मा गांधी की जयंती पर म्यूनिसिपल महिला आयुर्वेदिक औषधालय और मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र खोले गए थे। दस साल पहले वर्ष 2016 में इसका एडीए ने जीर्णोद्धार कराया था। गांधी स्मारक का गेट अब बंद रहता है और यह बदहाल है।
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