आगरा। किराए पर लगवाने के लिए कार लेने के बाद गिरोह उस कार को दूसरी जगह गिरवी रखकर रकम ले लेता था। इसके बाद रकम का बंटवारा कर दूसरा शिकार तलाशते थे। इसके लिए वे दस्तावेज और फोटो में बदलाव भी करते थे। ट्रांस यमुना पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार कर गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों से कुल 12 कारें और कई कूटरचित दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार ने बताया कि सुमित नगर, मंडी समिति के पास रहने वाले प्रबल प्रताप ने 10 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि नगला रामबल के धीरज और ट्रांस यमुना फेज-2 के हनुमंत सिंह परमार से उनका संपर्क हुआ। उन्होंने अलीगढ़ से खंदौली तक बन रहे सिक्स लेन रोड के निर्माण के दौरान अधिकारियों के आवागमन के लिए किराए पर गाड़ियां उपलब्ध कराने का काम करने की जानकारी दी।
उन्हें 30 हजार रुपये मासिक किराया और ड्राइवर, सर्विसिंग आदि कार्य खुद कराने के बारे में बताकर बातों में फंसाया। लालच में आकर उन्होंने अपनी स्विफ्ट डिजायर कार आरोपियों को दे दी। दो माह तक आरोपियों ने किराया दिया और फिर बात करना बंद कर दिया। उन्हें जानकारी हुई कि राजेश, अदनान और सुभाष चंद्र समेत कई लोगों को भी आरोपी इसी तरह जाल में फंसाकर कार ले चुके हैं।
कारों को दूसरे लोगों के पास गिरवी रख रुपये ले चुके हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर अलग-अलग कंपनियों की 12 महंगी कारें बरामद हुई हैं। पूछताछ में आरोपियों के दो साथी हाथरस के सैफऊ निवासी पुष्पेंद्र और सुनील के नाम प्रकाश में आए हैं। उनकी तलाश की जा रही है।
एप से बनाते थे कूटरचित दस्तावेज
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी लोगों को लालच देकर फर्जी एग्रीमेंट करवाते थे। उनके रजिस्ट्रेशन व आधार कार्ड लेकर वे लोग पीकार्ड एप से उस व्यक्ति के आधार कार्ड पर दूसरे व्यक्ति की फोटो लगाते हैं। जिस व्यक्ति की फोटो लगाना होता है उस व्यक्ति की व्यवस्था सुनील करता है। व्यक्ति को उस वाहन का मालिक बनाकर वे लोग गाड़ी को दूसरे लोगों के पास ले जाकर रुपयों की आवश्यकता बताते हुए तीन से चार लाख में गिरवी रख देते हैं। जिसके पास गिरवी रखते थे उस व्यक्ति के पास बनाए गए फर्जी दस्तावेज और फर्जी मालिक को साथ लेकर जाते थे, जिससे किसी को शक नहीं होता है। मिले रुपयों को आपस में बराबर-बराबर बांट लेते हैं।
सामने आ सकते हैं और पीड़ित
जिस तरह पुलिस को दो दिनों में ही आरोपियों की निशानदेही पर 12 कारें बरामद हुई हैं। उससे पुलिस को और पीड़ितों के सामने आने की भी आशंका है। भागे हुए पुष्पेंद्र और सुनील को गिरफ्तार करने पर और कारों की बरामदगी हो सकती है। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी है।