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स्वतंत्रता दिवस: आजादी के दीवानों ने क्रांति की ज्वाला से फूंक दिया था आयकर दफ्तर

Wed, 14 Aug 2019 12:23 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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अगस्त क्रांति - फोटो : अमर उजाला
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अगस्त क्रांति में ताजनगरी में जो घटनाएं हुईं, उनमें सबसे ज्यादा हलचल आयकर दफ्तर फूंके जाने से मची थी। यह बहुत मुश्किल काम था, लेकिन आजादी के दीवाने कहां रुकने वाले थे। पुलिस का पहरा होने के बावजूद दफ्तर को आग लगाई गई थी।
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उस समय आयकर दफ्तर उड़ेसर हाउस के पास एक कोठी में था। बाद में नगर निगम के मुख्य अधिकारी का कार्यालय और निवास इसमें बना। दफ्तर फूंकने में क्रांतिकारी प्रेमदत्त्त पालीवाल, पंडित श्रीराम शर्मा के ग्रुप से मनोहर लाल शर्मा, बसंत लाल झा, गोपीनाथ शर्मा, रामशरण सिंह, विजय शरण चौधरी, रामानंदाचार्य, पीतांबर पंत, रवि वर्मा शामिल थे। 

तारा सिंह धाकरे ग्रुप से तारा सिंह स्वयं, इंद्रपाल सिंह, शेख इनाम, रामबाबू पाठक और पुरुषोत्तम गौतम थे। तीन बार रात में प्रयास किया गया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया। लेकिन आजादी के दीवाने चल दिए ऑफिस को फूंकने के लिए।
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पहरेदारों को काबू कर लिया गया। विजयशरण चौधरी ने दियासलाई खोलकर तारा सिंह धाकरे को दी, उन्होंने अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी। अन्य साथियों ने रजिस्टर और अन्य कागज आग में डाल दिए। इसके बाद सभी क्रांतिकारी महाराजा अवागढ़ के बाग से लगी बाउंड्री के पास इकट्ठे होकर जलते दफ्तर की लपटों को देखने लगे।
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बटेश्वर में गिरफ्तार हुए थे अटल बिहारी वाजपेयी

बाह तहसील के अंतर्गत 27 अगस्त, 1942 को लीलाधर उर्फ ककुआ ने जनता के समक्ष उत्तेजक भाषण देते हुए फिरंगी हुकूमत का जंगल कानून तोड़ने का आह्वान किया। इसके बाद 500 लोगों ने वन विभाग के दफ्तर में तोड़फोड़ की, कर्मचारियों के क्वार्टर ढहा दिए। 

बिचकोली में दफ्तर को आग लगा दी। इसके तुरंत बाद गिरफ्तारियां शुरू हो गई। लीलाधर, अटल बिहारी वाजपेयी, उनके भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी और शोभाराम पकड़े गए थे। अंग्रेजी हुकूमत ने गांव पर दस हजार रुपये का सामूहिक जुर्माना हुआ।
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कागारौल में सिंचाई विभाग का दफ्तर फूंका

क्रांति की ज्वाला फैलती जा रही थी। कागारौल में सिंचाई विभाग का दफ्तर फूंक दिया गया। अगले दिन अंग्रेज अफसर पुलिस के साथ पहुंचे, सोनिगा और कागारौल को घेर लिया। सोनिगा से तीन हजार और कागारौल से एक हजार रुपये सामूहिक जुर्माना वसूला गया।

आगरा-धौलपुर रेल मार्ग पर स्टेशन से एक किमी. दूर नगरा पाडम के पन्नालाल, ख्यालीराम, भुम्म सिंह ने पटरी उखाड़ दी। प्रशासन सकते में आ गया। गांव पर दस हजार का जुर्माना किया गया। इसकी वसूली के लिए स्त्री और बच्चों तक पर बर्बरता की गई।
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