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हरि की पौड़ी में सतत जलप्रवाह जरूरी

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कासगंज सोरोंजी की हरि की पौड़ी उतराती मृत मछलियां - फोटो : KASGANJ
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सोरोंजी। तीर्थनगरी सोरोंजी की हरि की पौड़ी का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान वराह ने मलिनता के विनाश के लिए वराह अवतार लिया और हृण्याक्ष राक्षस का वध करके हरि की पौड़ी के जल में देह त्यागी। धार्मिक आस्था का इतना पवित्र स्थल होने के बावजूद हरि की पौड़ी में गंगाजल के सतत प्रवाह की कोई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है। जिससे शुद्ध जल का अभाव रहता है। दो दिन पूर्व हजारों मछलियों की मौत प्रदूषित जल के कारण हो गई। इस घटना ने तीर्थनगरी के वाशिंदों को झकझोर दिया है।
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पांच माह पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोरोंजी को तीर्थस्थल घोषित किया और अयोध्या काशी की तर्ज पर विकास का भरोसा दिया, लेकिन इन पांच महीनों में अभी तक कोई कार्य योजना धरातल पर उतरती दिखाई नहीं दे रही है। तीर्थनगरी में हरि की पौड़ी में शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित कराना बड़ा मुद्दा है। तीर्थपुरोहित काफी समय से गंगानदी से पाइप लाइन के माध्यम से शतत जल प्रवाह की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। मौजूदा समय में गोरहा नहर के माध्यम से हरि की पौड़ी को जलापूर्ति होती है, लेकिन यह जलापूर्ति खेती के रोस्टर के हिसाब से होती है। खेतों को जब पानी की मांग होती है, तभी पानी छोड़ा जाता है। पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा समय हो गया कि पानी की आपूर्ति हरि की पौड़ी में नहीं की गई है। जिससे हरि की पौड़ी के जल में ऑक्सीजन का लेविल कम हो गया है। मछली व अन्य जल जीवों की मौत हो रही है। हरि की पौड़ी में जलापूर्ति के लिए ठोस इंतजाम जरूरी हैं। तीर्थपुरोहित भारत किशोर दुबे ने मांग उठाई कि हरि की पौड़ी में सतत जल प्रवाह पाइपलाइन से गंगानदी या नहर के माध्यम से किया जाए। तीर्थपुरोहित सुरेश चंद्र त्रिवेदी, मदन मोहन दीक्षित ने भी सतत जल प्रवाह की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री को समस्या के समाधान के लिए किया ट्वीट
सोरोंजी। संत तुलसीदास नगर विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने तीर्थस्थल की हरि की पौड़ी गंगा में सतत जल प्रवाह का प्रबंध की मांग मुख्यमंत्री से ट्वीट कर की है। बूढ़ी गंगा की धारा चालू करके हरि की पौड़ी से जोड़कर सतत जल प्रवाह का सपना साकार हो सकता है।
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