प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश भर में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन को लेकर प्रधानमंत्री इतने गंभीर हैं कि इस योजना की स्वयं मॉनीटरिंग कर रहे हैं। अपनी हर सभा में वे लोगों को इसके लिए जागरूक भी करते हैं।
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वहीं आगरा में नगर निगम इस योजना को पलीता लगा रहा है। उसे पीएम के नाम की भी चिंता नहीं है। यही कारण है कि निगम की ओर से बनाये जा रहे सार्वजनिक शौचालय निर्माण में घटिया सामग्री मिली है। तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में हकीकत सामने आई है।
बता दें कि आगरा कमिश्नर के राममोहन राव ने शहर में नगर निगम द्वारा बनाए जा रहे सार्वजनिक शौचालयों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी से कराई है। इसमें 13 निर्माणाधीन शौचालयों में से सात का निरीक्षण उप निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार, राजकीय निर्माण निगम परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार, सहायक अभियंता जीपी द्विवेदी ने किया।
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ये मिली गड़बड़ियां
toilet
- फोटो : डेमो पिक
जांच कमेटी ने फ्रीगंज के दिल्लो का हाता में बनाए जा रहे दस सीटर शौचालय में पीली ईंटों का प्रयोग और बीम की जगह ईंट व पत्थर लगे पाए। प्लिंथ बीम तो किसी भी शौचालय में नहीं मिली।
वजीरपुरा की गियारा बस्ती, नगला महादेव, चमन लाल का बाड़ा, नुनिहाई और हनुमान नगर में बन रहे सार्वजनिक शौचालय में पुरानी नींव तक नहीं हटाई गई।
टेंडर में की ये गड़बड़ी
यहीं नहीं पुरानी नींव पर ही पुरानी ईंटों से निर्माण कर दिया गया, जबकि टेंडर में नई ईंटों का खर्च शामिल है। इसी तरह दरवाजे, खिड़कियों पर आरसीसी की जगह लाल पत्थर मिला है।
जांच कमेटी ने पुरानी ईंटों और आरसीसी की जगह पत्थर डालने पर लागत की कटौती ठेकेदार से क रने के निर्देश दिए हैं। इसकी जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंप दी गई है। सात सार्वजनिक शौचालय 90 सीटर हैं। इन पर एक करोड़ रुपये की राशि खर्च हो रही है लेकिन घटिया निर्माण कर नगर निगम हादसे का इंतजार कर रहा है।
इन जगहों पर बन रहे शौचालय
- पीर कल्याणी, वाल्मीकि बस्ती
- फ्रीगंज, दिल्लो का हाता
- वजीरपुरा, गियारा बस्ती
- फ्रीगंज नगला महादेव
- फ्रीगंज, चमनलाल का बाड़ा
- नुनिहाई, हनुमान नगर
- हनुमान नगर, महिला शौचालय
नाला काजीपाड़ा में एक महीने पहले ही सार्वजनिक शौचालय की दीवार हटाते समय हादसा हुआ था। इसमें एक मजदूर की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पूर्व में सार्वजनिक शौचालय के ढह जाने से एक महिला भी मौत हुई है। सेप्टिक टैंक के ढह जाने और लोगों के गिरने के कई मामले आगरा में हो चुके हैं। फिर भी सार्वजनिक शौचालयों में पीली ईंटों और पत्थरों से निर्माण पर नगर निगम ने आंखें बंद कर ली हैं।