वह मैरिज होम की छत से व्यापारी घर की छत पर गए थे। छत पर लगे दरवाजे में छेद किया। इसके बाद दरवाजे की कुंडी खोल ली थी। कमरे में मां-बेटी सो रही थीं। दोनों जाग गई थीं। इसके बाद शोर मचाना शुरू कर दिया था। रोकने पर हमलावर हो गईं। इस पर उन्होंने दोनों की पिटाई की थी। मुंह पर मुक्के और बरमा मारे थे। साड़ी से हाथ-पैर भी बांध दिए थे। शोर न करें, उसके लिए तकिये से मुंह दबा दिया। इससे दोनों की मौत हो गई।
बच्चे को डरा धमकाकर चुप कर दिया था। हत्या के बाद एक अलमारी से रुपये और जेवरात लूटकर फरार हो गए थे। ऐसे रास्ते से भागे, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। जंगल में जाकर माल का बंटबारा कर लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लूट का माल और अन्य सामान बरामद किया गया। उन्होंने फिरोजाबाद, पिनाहट और फतेहाबाद में तीन घरों को वारदात के लिए चिह्नित किया था। इससे पहले ही उन्हें पकड़ लिया गया।
इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने पिनाहट के गांव झूरियान निवासी मेघराज, फिरोजाबाद के नगला दया निवासी रामवीर, एत्मादपुर के रहनकला निवासी राजेश और डौकी के महल बादशाही निवासी सुनील को गिरफ्तार किया है। वहीं फिरोजाबाद के रामदासपुरा निवासी भरत फरार हो गया। आरोपियों से एक बरमा, लूटे गए जेवरात, दो बाइक, चार दस्ताने, छह मोबाइल और दो तमंचे बरामद किए गए।
मेघराज और रामवीर हैं सरगना
पुलिस ने बताया कि मेघराज और रामवीर गैंग के सरगना है। मेघराज के खिलाफ नौ मुकदमे दर्ज हैं, जबकि रामवीर के खिलाफ 20 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 11 फिरोजाबाद, चार बाह, तीन डौकी, एक-एक फतेहपुर सीकरी और फतेहाबाद में दर्ज हैं। इनमें गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट, लूट, हत्या, जानलेवा हमला, अपहरण के मुकदमे शामिल हैं।
खुलासे पर सवाल: लूट में मुकदमा, अब डकैती के दौरान हत्या में चालान
उमेश पेंगोरिया ने बताया कि वह खुलासे से संतुष्ट नहीं हैं। उनके घर में पांच बदमाशों ने डकैती डाली थी। पहले दिन से ही धेवता अनुज यह बात कह रहा है। मगर, पुलिस ने दो बदमाशों के खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस धेवते से 20 से अधिक बार पूछताछ भी कर चुकी थी। उनके घर से बदमाश दस लाख रुपये, 15 तोले सोने और आधा किलोग्राम चांदी के जेवरात लूट ले गए थे।
जेवरात की लिस्ट भी पुलिस को दी थी। खुलासा किया गया तो चार बदमाश दिखाए गए। एक फरार है। धेवते से किसी की शिनाख्त तक नहीं कराई गई। बरामद गहनों की पहचान तक नहीं कराई। बस गहनों की डिब्बी पर हस्ताक्षर करा लिए गए। रकम की बरामदगी नहीं हुई। जेवरात भी नाम मात्र के बरामद हुए हैं। आरोपियों का चालान भी डकैती के दौरान हत्या में कर दिया गया।