मैनपुरी स्थित समान पक्षी विहार (526.30 हेक्टेयर में फैले) को वर्ष 1990 में वन्य विभाग का संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया। सारस खुली, आर्द्र एवं दलदली भूमि में रहना पसंद करता है। यहां मौजूद धान के खेत उनके प्राकृतिक आवास और भोजन के लिए उपयुक्त स्थल का काम करते हैं। यही कारण है कि सारस, समान पक्षी विहार से ज्यादा पक्षी इसकी सीमा से लगे 15 गांवों में नजर आते हैं। ऐसे में वन विभाग की कोशिश है कि वह अपने क्षेत्र में छोटे-छोटे आईलैंड विकसित करे जिन पर धान की खेती की जाए तो राज्य पक्षी गांवों के साथ-साथ पक्षी अभयारण्य की सीमा में भी विचरण करने लगेंगे।
राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट की डीएफओ आरुषि मिश्रा ने बताया कि सारसों के संरक्षण की परियोजना के लिए स्वीकृति मिलने का इंतजार है। यदि मिलती है तो पक्षी विहार की भूमि पर ऐसे इंतजाम करने का प्रयास किया जाएगा जिससे भविष्य में अगर खेतों पर निर्माण कार्य आदि हों तो पक्षी के पास उनके प्राकृतिक आवास की वैकल्पिक व्यवस्था हो।