श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार यमुना उफान पर होगी। हरियाणा के ताजेवाला बांध से 8.28 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जन्माष्टमी तक मथुरा पहुंच जाएगा। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। यमुना किनारे बाढ़ चौकियों को भी चौकस कर दिया है। गोकुल बैराज के गेट खोल दिए गए हैं।
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने के बाद यमुना उफान पर आ गईं थीं। यमुना के इस रौद्र रूप को देखते हुए वासुदेव जी कंस कारागार से कन्हैया को सिर पर सूप में लिटाकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचाते हैं।
यमुना के उफान का यह दृश्य एक बार फिर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर इस बार 24 अगस्त को दिखाई देगा। हथिनीकुंड बैराज से रविवार को छोड़ा गया पानी पांच दिन बाद मथुरा पहुंच जाएगा। इससे मथुरा के साथ वृंदावन और गोकुल में यमुना लबालब होगी।
प्रभारी अधिकारी एडीएम वित्त बृजेश कुमार ने बताया कि यमुना किनारे की बाढ़ चौकियों को सतर्कता के निर्देश जारी किए गए हैं। निकटवर्ती गांवों में लोगों को सावधान किया जाएगा। एहतियात के तौर पर पानी की मात्रा को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जाएगी। सबसे पहले गोकुल बैराज के सभी गेट खोले गए हैं।
इस दशक में सबसे अधिक पानी
इस बार यमुना में वर्तमान दशक का सबसे अधिक पानी रविवार को ताजेवाला बांध से छोड़ा गया है। 2010 में 7 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि 2013 में पानी की यह मात्रा आठ लाख क्यूसेक से अधिक थी। पिछले साल भी छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
इस दौरान मथुरा में पानी का जल स्तर पर अधिकतम रहा था। 2013 में प्रयागघाट पर यमुना का जल स्तर 166.03 मीटर रहा था, जबकि 2018 में 165.70 मीटर तक यमुना उफान पर रही थी। इस बार यह दोनों ही आंकड़े पीछे रह जाएंगे। इस दशक का सबसे अधिक पानी भी रविवार को छोड़ा गया है। इसमें भी अभी ओर इजाफा होने के संकेत मिल रहे हैं।
यमुना में खतरे का निशान
प्रयागघाट पर चेतावनी लेवल- 165.20 मीटर
खतरे का निशान- 166.00 मीटर
बाढ़ के चलते यमुना किनारे बनी कालोनियों में रह रहे लोगों में हलचल मचने लगी है। दो वर्ष पूर्व भी यमुना का पानी नदी किनारे बनीं कालिंदी विहार, यमुना विहार एवं कालीदह के निकट की कालोनियों में घुस गया था।